NOTA will Not be Available in the 2026 Civic Elections : अगर आप 2026 में होने वाले निकाय चुनावों में Vote डालने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है।
इस बार जब आप मतदान केंद्र पर जाएंगे, तो आपके मतपत्र पर ‘NOTA’ यानी ‘None of The Above’ का विकल्प नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि आप “इनमें से कोई नहीं” का चुनाव नहीं कर पाएंगे।

क्या है पूरा मामला
आमतौर पर लोकसभा और विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में मतदाताओं को यह अधिकार मिलता है कि अगर उन्हें कोई भी उम्मीदवार पसंद न हो, तो वे NOTA का बटन दबा सकें।
लेकिन कई राज्यों के राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि निकाय चुनावों में NOTA का प्रावधान नहीं रखा गया है। इसलिए नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत जैसे चुनावों में मतदाताओं को यह विकल्प नहीं मिलेगा।
क्यों हटाया गया NOTA का विकल्प
निकाय चुनावों में NOTA न होने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण संसदीय कानून से जुड़ा है और दूसरा व्यावहारिक व्यवस्था से।
संसदीय कानून का नियम: NOTA का अधिकार मुख्य रूप से लोकसभा और विधानसभा जैसे बड़े चुनावों में लागू होता है। राज्यसभा और विधान परिषद जैसे अप्रत्यक्ष चुनावों में भी यह लागू नहीं होता।

स्थानीय निकाय चुनावों के नियम राज्यों के अपने-अपने नगर निकाय कानूनों (Municipal Acts) पर आधारित होते हैं, जिनमें NOTA का प्रावधान नहीं है।
सीधा मुकाबला: निकाय चुनाव छोटे वार्डों में होते हैं, जहां उम्मीदवारों की संख्या सीमित रहती है। यहां यह माना जाता है कि मतदाता उपलब्ध उम्मीदवारों में से किसी एक को चुनें, ताकि स्थानीय सरकार के गठन में कोई बाधा न आए।
वोटर अब क्या करें?
अगर आपके Ward में कोई भी उम्मीदवार आपको पसंद नहीं है, तो अब आपके पास केवल दो ही रास्ते हैं।
पहला: उपलब्ध उम्मीदवारों में से जो आपको सबसे बेहतर या कम खराब लगे, उसे वोट दें।
दूसरा: वोट न डालें। हालांकि, एक जागरूक नागरिक के रूप में मतदान करना आपकी जिम्मेदारी मानी जाती है।
लोकतंत्र पर क्या असर पड़ेगा
NOTA का विकल्प न होने से कुछ मतदाताओं में निराशा जरूर हो सकती है, लेकिन चुनाव आयोग का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर स्थिर सरकार बनाना आसान होगा।
निकाय चुनावों का उद्देश्य स्थानीय विकास और प्रशासन को मजबूत करना है, इसलिए मतदाताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे सक्रिय भागीदारी करें।
मतदाताओं के लिए संदेश
2026 के निकाय चुनाव में NOTA नहीं होने की स्थिति में मतदाताओं को सोच-समझकर फैसला लेना होगा। सही उम्मीदवार का चयन करना या फिर मतदान प्रक्रिया में भागीदारी दिखाना, दोनों ही लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।




