Petition Regarding Sugabandhan Dam in Godda Dismissed : गोड्डा जिले में सुगाबंधन डैम बनाए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने सोमवार को सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान याचिका को वापस ले लिया गया, जिसके बाद मामला समाप्त हो गया। यह जनहित याचिका गोड्डा से सांसद Nishikant Dubey की ओर से दायर की गई थी।

कोर्ट ने क्यों नहीं दिया हस्तक्षेप का आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने साफ कहा कि डैम बनाना या न बनाना सरकार का नीतिगत निर्णय है।
कोर्ट इस तरह के मामलों में दखल नहीं दे सकती और न ही सरकार को किसी खास स्थान पर डैम बनाने का आदेश दे सकती है।
सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इससे पहले भी इसी तरह की जनहित याचिका दायर की जा चुकी है, लेकिन उस पर High Court ने कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया था।
सरकार ने यह भी कहा कि पानी और सिंचाई से जुड़े फैसले नीति और संसाधनों को देखते हुए लिए जाते हैं।

1972 के प्रस्ताव का हुआ जिक्र
याचिका में यह बात भी रखी गई थी कि वर्ष 1972 में गोड्डा में सुगाबंधन Dam बनाने का प्रस्ताव था।
उस समय कहा गया था कि अगर बिहार के चानन Dam से झारखंड को भविष्य में पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो गोड्डा में यह डैम बनाया जाएगा। इसके लिए जमीन भी चिह्नित की गई थी।
याचिकाकर्ता की बात
प्रार्थी की ओर से यह दलील दी गई कि अगर Sugabandhan Dam बनता है तो गोड्डा के लोगों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी और किसानों को लाभ होगा।
याचिका खारिज
सभी पक्षों को सुनने के बाद Court ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने दोहराया कि इस तरह के फैसले सरकार के स्तर पर ही लिए जाने चाहिए।




