Mamata Banerjee Made serious Allegations : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सोमवार को 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचीं।
यह मुलाकात आयोग के अधिकारियों से हुई, लेकिन बातचीत के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि Election Commission उनकी बात सुनना नहीं चाहता और इसी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
आयोग पर पक्षपात का आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भाजपा के एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के नाम पर अकेले पश्चिम बंगाल में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
ममता का कहना है कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है और इससे आम लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन थे शामिल
TMC के प्रतिनिधिमंडल में ममता बनर्जी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी और SIR प्रक्रिया से प्रभावित 12 परिवारों के सदस्य भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर अपनी शिकायतें आयोग के सामने रखने की कोशिश की।
“बहिष्कार नहीं, संघर्ष करेंगे”
जब पत्रकारों ने ममता बनर्जी से पूछा कि क्या वह चुनाव का बहिष्कार करेंगी, तो उन्होंने साफ कहा कि TMC बहिष्कार नहीं करेगी, बल्कि लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने चुनाव आयोग के रवैये को अहंकारी बताते हुए कहा कि आयोग के अधिकारियों ने अपमानजनक व्यवहार किया।
चुनाव आयोग का पलटवार
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, TMC नेताओं का व्यवहार ठीक नहीं था और अधिकारियों को धमकाया गया। आयोग ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अधिकारियों और तबादलों का मुद्दा
आयोग ने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल सरकार ने बिना अनुमति तीन Electoral Roll Observer का तबादला किया।
साथ ही कुछ ERO, AERO और डेटा एंट्री ऑपरेटर पर लापरवाही और निजी जानकारी साझा करने के आरोप हैं। आयोग का कहना है कि इस पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा गया, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं हुई।
यह पूरा मामला आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक बहस को और तेज करता नजर आ रहा है।




