झारखंड : हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से कहा- निदेशक और सचिव कोई भी नियम-कानून नहीं बना सकते

रांची : माध्यमिक शिक्षा निदेशक को जारी अवमानना नोटिस मामले में गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई। इस दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक हर्ष मंगला कोर्ट में उपस्थित हुए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को कहा कि विभाग से बना नियम गलत है। सचिव और निदेशक कोई भी नियम-कानून नहीं बना सकते। इसके लिए कैबिनेट से स्वीकृति जरूरी है।

ऐसे में किस आधार पर शिक्षकों का वेतनमान रोका गया और क्यों शिक्षकों को लाभ से वंचित रखा गया? इस पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक से अगली सुनवाई तक रिपोर्ट की मांग की गयी है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक पर अवमानना नोटिस जारी किया था। साथ ही अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया था।

उल्लेखनीय है कि मामले को लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। संघ ने याचिका में बताया है कि राज्य के शिक्षकों को बढ़े हुए वेतनमान का लाभ नहीं मिला है।

कई ऐसे शिक्षक हैं, जो रिटायर भी हो गये हैं। शिक्षा विभाग ने साल 1993 से ही शिक्षकों को बढ़े हुए वेतनमान का लाभ नहीं दिया।

नियमानुसार 12 साल में वेतनमान और 24 साल की सेवा के बाद वरीय वेतनमान में बढ़ोतरी की जाती है। लेकिन, शिक्षकों को अभी तक इसका कोई लाभ नहीं मिला है।

इस मामले में साल 2015 में ही हाई कोर्ट ने सभी तरह का लाभ देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। लेकिन, सरकार की ओर से कुछ भी नहीं किया गया।

इस पर उनकी ओर से अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की गयी है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुबोध कुमार पांडेय ने मामले में पक्ष रखा।

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