Savitribai Phule’s Birth Anniversary: अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की ओर से आज महेंद्र सिंह भवन, चर्च रोड में भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) की जयंती के अवसर पर बहनापा सप्ताह की शुरुआत की गई।
यह सप्ताह 3 जनवरी से 9 जनवरी तक चलेगा। कार्यक्रम के पहले दिन एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं के सामाजिक, शैक्षणिक और संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से बात की गई।
इसी मौके पर महान आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा की जयंती भी श्रद्धा के साथ मनाई गई।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी, विचारों का खुला मंच
इस परिचर्चा में शांति सेन, ऐति तिर्की, गीता गाड़ी, प्रियंका, कंचन उरांव, सपना गाड़ी, नीलम केवट, लेलो उरांव, चांदों तिर्की, सुनीता तिर्की, सुमी उरांव, मीनू शाहा, सुषमा गाड़ी, मेवा लकड़ा, संगीता कच्छप, सलोनी केवट, संभवी, नंदिता भट्टाचार्य सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
सभी महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और समाज में महिलाओं की स्थिति पर खुलकर विचार रखे।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी
कार्यक्रम में भाकपा (माले) के राज्य सचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) से जुड़े मनोज भक्त के साथ शुवेंदु सेन, अनंत प्रसाद गुप्ता, विजय कुमार, पंकज, निखिल, आरएन सिंह और मोहन दत्त भी शामिल हुए।
वक्ताओं ने महिलाओं के संघर्ष और समानता के सवालों को सामाजिक आंदोलन से जोड़कर देखने पर जोर दिया।
महिलाओं के अधिकार और शिक्षा पर जोर
परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने देश में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर चिंता जताई और इसे एक गंभीर सामाजिक समस्या बताया। साथ ही महिलाओं के लिए मुफ्त शिक्षा की मांग रखी गई।
सभी धर्मों की महिलाओं को समान सम्मान और अधिकार देने की बात भी प्रमुख रूप से सामने आई।
संविधान और समानता की बात
वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा सत्ता संविधान के मूल्यों को नजरअंदाज कर मनुस्मृति जैसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिससे महिलाओं के अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने संविधान में दिए गए समानता और न्याय के अधिकारों की रक्षा को जरूरी बताया।
जागरूकता अभियान का ऐलान
ऐपवा ने घोषणा की कि बहनापा सप्ताह के दौरान महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता अभियान (Awareness Campaign) चलाया जाएगा।
इसके तहत जनसंपर्क, संवाद और समाज के विभिन्न वर्गों से बातचीत की जाएगी, ताकि महिलाओं के हक की आवाज़ और मजबूत हो सके।




