पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में नहीं उतरेंगी सोनिया, राज्य संगठन की मांग पर फिर असम दौरे पर जाएंगी प्रियंका

नई दिल्ली: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव प्रचार में व्यस्त हो गए हैं।

प्रियंका आमतौर पर बहुत कम उत्तर प्रदेश से बाहर निकलती हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने जिस तरह असम का दौरा कर पार्टी के राज्य संगठन को सक्रिय किया, उसकी पार्टी संगठन में सराहना हो रही है।

प्रियंका गांधी के असम दौरे में जिस तरह चाय बागान मजदूरों, महिलाओं और अन्य मुद्दों को उठाया उसकी खूब चर्चा हुई।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय नेतृत्व को भेजी रिपोर्ट में प्रियंका गांधी वाड्रा के दोबारा दौरे की मांग की है।

पार्टी ने अपनी रिपोर्ट में प्रियंका के असम दौरे को बेहद सफल बताते हुए कहा प्रियंका गांधी के असम में प्रचार करने से तस्वीर बदल सकती हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार इस मांग के बाद प्रियंका ने अपने सहयोगियों को असम के दोबारा दौरे की तिथियां फाइनल करने को कहा है। सूत्रों के अनुसार प्रियंका गांधी जल्द असम के दौरे पर दोबारा जा सकती हैं।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी भले ही असम तक सीमित हों, लेकिन पांचों चुनावी राज्यों से प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार में आने की मांग आई है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा मांग पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की है, उसके बाद दूसरे नंबर पर प्रियंका गांधी हैं।

उल्लेखनीय है कि दशकों से चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या राज्यों का चुनाव, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही कांग्रेस की चुनाव प्रचार की कमान संभालते रहे हैं।

प्रियंका गांधी ने खुद को अमेठी और रायबरेली तक सीमित रखा था, जहां वह अपनी मां और अपने भाई के लोकसभा क्षेत्रों का प्रबंधन देखती थी।

पार्टी महासचिव नियुक्त होने और उत्तर प्रदेश का प्रभार मिलने के बाद प्रियंका गांधी पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं, लेकिन पिछले दिनों असम में पार्टी का प्रचार करके उन्होंने संकेत दे दिया है कि पार्टी के कहने पर वह पूरे देश में चुनाव प्रचार के लिए तैयार हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के चुनाव प्रचार करने की संभावना नहीं है।

इसका मतलब यह है कि सोनिया गांधी बिहार विधानसभा चुनाव की तरह ही पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी कोई रैली नहीं करेंगी।

हालांकि वह अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले सकती हैं।

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