रांची : रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग की ओर से लोक जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और अध्ययन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जा रहा है। यह व्याख्यान “फगुआ : राग एवं ताल” विषय पर दिनांक 13 फरवरी को दोपहर 12 बजे से आयोजित होगा।
इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध लोकगायक एवं लोक कलाकार, राग रागिनी के विशेषज्ञ पद्मश्री मधु मंसुरी ‘हंसमुख’ मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। वे फगुआ गीतों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, रागात्मक संरचना, ताल-व्यवस्था तथा लोक जीवन में इसके सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

फगुआ झारखंड की लोक-संस्कृति में केवल एक पर्वगीत नहीं, बल्कि सामूहिक उल्लास, सामाजिक समरसता और लोक चेतना का सशक्त माध्यम रहा है। इस व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों में को फगुआ की शास्त्रीयता और लोकात्मकता के समन्वय को समझने का अवसर मिलेगा।
स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ उमेश नन्द तिवारी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से क्षेत्रीय भाषाओं और लोक कलाओं के प्रति अकादमिक रुचि सुदृढ़ होती है तथा नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है। यह जानकारी विभाग के शिक्षक डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो और डॉ रीझु नायक ने दी।




