Big Relief from Supreme Court on illegal Construction : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) इलाके में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामलों में Supreme Court से चार याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
कोर्ट ने फिलहाल संबंधित भवनों पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इससे इन भवन मालिकों को अस्थायी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
इस मामले की सुनवाई Supreme Court की खंडपीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे।
कोर्ट ने गंगा रीजेंसी, पटियाला विंस बिल्डिंग सहित दो अन्य निर्माणों के मामले में फिलहाल स्थिति जस की तस रखने को कहा है।
Court ने साफ किया कि जब तक मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से क्या कहा गया
याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता विनीत सिन्हा और अधिवक्ता देवेश अजमानी ने पक्ष रखा।

उन्होंने अदालत को बताया कि Jharkhand High Court ने पहले तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य प्रशासन को कार्रवाई का निर्देश दिया था।
लेकिन समिति द्वारा रिपोर्ट तैयार करने से पहले याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
बिना सुनवाई के तोड़फोड़ पर आपत्ति
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि यदि उनके निर्माण गिराए जाते हैं तो उन्हें भारी नुकसान होगा। बिना सुनवाई के किसी को बेदखल नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा, उन्हें उस जनहित याचिका में पार्टी भी नहीं बनाया गया था, जिसमें आदेश पारित किया गया। इसके बावजूद उनके खिलाफ आदेश दे दिया गया, जो गलत है।
हाईकोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती
दरअसल, यह पूरा मामला Jharkhand High Court के 14 जनवरी 2026 के आदेश से जुड़ा है। उस आदेश में तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर जेएनएसी को अवैध निर्माण तोड़ने का निर्देश दिया गया था।
बाद में प्रतिवादियों द्वारा दायर आवेदनों को हाईकोर्ट ने 28 और 29 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया था। इन सभी आदेशों को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
JNAC को पहले मिला था तोड़फोड़ का आदेश
राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने JNAC क्षेत्र में 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया था।
इसी आदेश के बाद कई भवनों पर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई थी, जिससे भवन मालिकों में चिंता थी।
अब आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल Notice जारी करते हुए मामलों को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ टैग करने का निर्देश दिया है।
साथ ही, जमानत से जुड़ा आवेदन भी स्वीकार किया गया है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस पूरे मामले पर विस्तृत फैसला आ सकता है।




