Supreme Court verdict on Examination Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC ) से जुड़ी न्यायिक सेवा परीक्षा के विवाद पर अहम निर्णय सुनाया है।
अदालत ने Jharkhand High Court के फैसले के कुछ पैरा को रद्द करते हुए JPSC को चयन प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

किस बात को लेकर हुआ था विवाद
वर्ष 2023 में सिविल जज (Junior Division) की नियुक्ति के लिए JPSC ने विज्ञापन जारी किया था।
लिखित परीक्षा के बाद जब आंसर-की जारी हुई, तो कुछ सवालों के जवाबों को लेकर आपत्तियां सामने आईं। खास तौर पर सवाल नंबर 8, 47, 96 और 98 के उत्तरों पर विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कुछ उत्तरों को गलत बताते हुए अंक गणना के तरीके में बदलाव करने के निर्देश दिए थे।
इसी आदेश के खिलाफ JPSC ने Supreme Court में अपील दायर की थी और कहा था कि परीक्षा से जुड़े तकनीकी फैसले विशेषज्ञों के दायरे में आते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट खुद ‘सुपर एग्जामिनर’ की भूमिका नहीं निभा सकता। कोर्ट ने माना कि उत्तरों की सही-गलत का फैसला विशेषज्ञों द्वारा ही होना चाहिए।
इसी आधार पर अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 33, 36, 39, 40 और 41 को रद्द कर दिया।
अब आगे क्या होगा
शीर्ष अदालत ने JPSC को निर्देश दिया है कि वह उत्तरों से जुड़े विवाद सुलझाकर Merit List जल्द जारी करे और न्यायिक सेवा में चयन की प्रक्रिया पूरी करे। इस फैसले के बाद उम्मीदवारों को उम्मीद है कि नियुक्ति में अब अनावश्यक देरी नहीं होगी।




