Without Prime Ministerial Speech : नई दिल्ली में गुरुवार को लोकसभा (Lok Sabha) में एक अलग ही स्थिति देखने को मिली।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही ध्वनिमत से पारित हो गया। खबरों के अनुसार, पिछले 22 वर्षों में यह पहला मौका है जब किसी प्रधानमंत्री के बोले बिना ही यह प्रस्ताव पास किया गया।

PM भाषण के लिए थे तैयार
लोकसभा सचिवालय (Lok Sabha Secretariat) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi सदन में बोलने के लिए पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे।
लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सदन का माहौल बिगड़ गया। इसी दौरान कांग्रेस की ओर से सदन में प्रधानमंत्री को घेरने की योजना बनाई गई थी।
हंगामे के पीछे क्या वजह
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कई बार बातचीत कर स्थिति शांत करने की कोशिश की गई।
अधिकारियों ने विपक्ष को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे हंगामा जारी रखने पर अड़े रहे। किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री का भाषण टाल दिया गया।

गंभीर आरोप और सुरक्षा चिंता
BJP सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर शारीरिक हमले की साजिश रची थी।
उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल की तरह आगे किया गया और PM की कुर्सी को घेरने की तैयारी थी। इन आरोपों के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई।
स्पीकर का बड़ा फैसला
हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। उस समय प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। सचिवालय सूत्रों ने इस स्थिति को असामान्य और अभूतपूर्व बताया।
अध्यक्ष का बयान
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें बहुत दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि बुधवार को उनके कक्ष में कुछ सदस्यों का व्यवहार मर्यादा के खिलाफ था।
उन्होंने इसे संसद की गरिमा पर काला धब्बा बताया और कहा कि सदन सभी को मिलकर सम्मानजनक तरीके से चलाना चाहिए।
अप्रिय घटना की आशंका
अध्यक्ष ने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ सांसद प्रधानमंत्री के साथ कोई अप्रिय घटना कर सकते हैं। इसके बाद उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे उस समय सदन में न आएं।
लोकसभा में हुआ यह घटनाक्रम लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
बिना प्रधानमंत्री के भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पारित होना अपने आप में एक बड़ा संकेत है। अब सवाल यह है कि आगे सदन की कार्यवाही किस दिशा में जाएगी और क्या राजनीतिक दल इससे कोई सबक लेंगे।




