रांची : ब्रिटिश जमाने का रेलवे इंजन हटिया डीआरएम ऑफिस की शोभा बढ़ा रहा है। बीडीआर क्वीन रेल इंजन जो हटिया डीआरएम ऑफिस परिसर में सहेज कर रखा गया है, ब्रिटिश रेलवे की विरासत है और तब रांची बंगाल नागपुर रेलवे के अंतर्गत आता था। बीडीआर क्वीन रेल इंजन भाप से चलनेवाला एक नैरोगेज इंजन था जिसे डब्ल्यूजी बागनेल ने बनाया था। यह एक डेल्टा क्लास का इंजन था।
दरअसल, वर्ष 1913 में तत्कालीन बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर फ्रेजर ने पुरूलिया से रांची तक नैरोगेज लाइन पर रेलगाड़ी की शुरूआत की थी। वर्ष 1917 में इसे रांची से लोहरदगा तक बढ़ा दिया गया। अंग्रेजी हुकूमत ने लोहरदगा में स्थित बॉक्साइट के खदानों तक आवागमन के लिए इस रेल की शुरुआत की थी। वर्ष 1987 तक यह वाष्प का इंजन नैरोगेज रेल को लेकर चलता था। इसके बाद एक छोटा डीजल इंजन इस रेलगाड़ी में जोड़ा गया जो वर्ष 2001 तक रांची से लोहरदगा तक चलता रहा। वर्ष 2003 में नैरोगेज से यह लाईन ब्राड गेज मे बदल गयी। आज यह इंजन एक बोगी के साथ हटिया स्टेशन के बगल मे डिवीजन रेल मैनैजर आफिस के परिसर मे रेलवे की इतिहास की शोभा बढ़ा रहा है।

गौरतलब है कि पुरुलिया से रांची के बीच नैरोगेज (2 फीट 6 इंच/762 मिमी) रेलगाड़ी की शुरुआत 14 नवंबर 1907 को हुई थी। इस लाइन (पुरुलिया-रांची लाइट रेलवे) का उद्घाटन बंगाल के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एंड्रयू फ्रेजर ने किया था, जो मुख्य रूप से बंगाल-नागपुर रेलवे (BNR) का हिस्सा थी। बाद में इसे लोहरदगा तक बढ़ाया गया और फिर ब्रॉड गेज में बदला गया।




