Sabar Samilies of Jadugoda are still in a Bad State : राज्य सरकार एक ओर आदिवासी समुदायों के उत्थान और सशक्तिकरण (Empowerment) के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है।
मुसाबनी प्रखंड के अंतर्गत जादूगोड़ा क्षेत्र की मुरागुड़ी पंचायत के गांव रूआम में रहने वाली सबर जनजाति की स्थिति बेहद चिंताजनक है।

इस गांव के कुलगोडा टोला में रहने वाले 13 सबर परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और बदहाल जीवन जीने को मजबूर हैं।
जर्जर आवास और गिरने का डर
ग्रामीणों के अनुसार, इन परिवारों को करीब 30 साल पहले इंदिरा आवास योजना (Indira Awas Yojana) के तहत घर मिले थे, लेकिन अब वे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं।
छतें कभी भी गिर सकती हैं और बरसात के मौसम में घरों के अंदर पानी टपकता है।
कई घरों में दरवाजे तक नहीं हैं, जिससे ठंड और बारिश में रात बिताना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें नए आवास की सख्त जरूरत है।

पानी की गंभीर समस्या
गांव में पीने के पानी की स्थिति भी बेहद खराब है। आसपास के कई चापाकल खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ओर से Corporate सामाजिक दायित्व के तहत एक पानी की टंकी दी गई थी, लेकिन वहां से सबर परिवारों को पानी लेने नहीं दिया जाता।
पैसे की कमी के कारण ये परिवार मोटर की मरम्मत भी नहीं करवा पा रहे हैं।
इलाज के बिना जूझती जिंदगी
ग्रामीण बताते हैं कि सोनू सबर गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उसके हाथ का घाव काफी बढ़ गया है और इलाज के अभाव में कभी भी जान को खतरा हो सकता है।
Community Health Center में डॉक्टर उसे देखकर लौटा देते हैं, जिससे वह बिना इलाज के जीवन और मौत के बीच झूल रहा है।
सरकारी मदद का इंतजार
ग्रामीण विश्वनाथ महतो, सपन हेस्सा और अन्य ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सबर परिवारों को तुरंत नया आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
उनका कहना है कि ठंड खत्म होने को है, लेकिन इन परिवारों को अब तक सरकारी कंबल तक नसीब नहीं हुआ।
छात्र नजरिया
एक छात्र के रूप में यह साफ दिखाई देता है कि योजनाएं कागजों में जरूर सफल हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी कई परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जरूरत है कि प्रशासन समय रहते इन सबर परिवारों की सुध ले, ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके।




