3 साल बाद भी पोस्टिंग नहीं! डीएसपी नियुक्ति पर झारखंड में सियासी घमासान, विधानसभा में गूंजेगा मामला

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रांची: झारखंड में 7वीं से 10वीं जेपीएससी के जरिए बहाल किए गए डीएसपी अधिकारियों की नियमित पोस्टिंग में हो रही देरी पर अब सियासी घमासान शुरू हो चुका है। साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी इन अधिकारियों को न तो स्वतंत्र प्रभार मिला है और न ही नियमित पदस्थापन। अब इस को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सत्र से पहले बगोदर के विधायक नागेंद्र महतो ने इस मामले को गंभीरता से उठाया। उन्होंने तारांकित प्रश्न के जरिए सरकार से जवाब मांगा है। उनका सीधा सवाल है कि आखिर इतनी लंबी अवधि गुजरने के बाद भी इन अधिकारियों को नियमित जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी गई?

गृह विभाग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग भी सक्रिय हो गया है। विभाग ने डीजीपी से पूरी रिपोर्ट तलब की है। अवर सचिव अजीत कुमार सिंह ने पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि 9 मार्च को विधानसभा में पूछे जाने वाले प्रश्न के मद्देनजर सभी तथ्यात्मक जानकारी जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि सदन में सरकार की ओर से स्पष्ट और ठोस जवाब दिया जा सके। अब सबकी नजर विधानसभा सत्र पर टिकी है, जहां इस मुद्दे पर सरकार को जवाब देना होगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।