UGC’s new Rules Spark Uproar : नई दिल्ली में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
इन नियमों को लेकर Central Government भी घिरती नजर आ रही है। खास बात यह है कि विरोध सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि BJP के भीतर भी इसे लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।

वहीं, छात्रों का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं और उच्च शिक्षा में समानता के नाम पर भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं।
नए नियमों के खिलाफ छात्र आंदोलन
UGC के नए नियमों के अनुसार इन्हें उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए लाया गया है।
लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में सामान्य वर्ग के छात्र इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। बीते कई दिनों से छात्र जगह-जगह धरना-प्रदर्शन और मार्च निकाल रहे हैं।
दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
मंगलवार को Delhi के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित UGC मुख्यालय के बाहर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र अपने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते नजर आए।

उन्होंने “सवर्ण विरोधी नियम वापस लो”, “उच्च शिक्षा में समानता नहीं, यह विभाजन है” जैसे नारे लगाए। स्थिति को देखते हुए UGC मुख्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
15 जनवरी से लागू हुए नियम
छात्रों ने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के लिए बनाए गए नियम, 2026 को 15 जनवरी 2026 से लागू किया गया है। तभी से देशभर में इसे लेकर हंगामा मचा हुआ है।
छात्रों का कहना है कि नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय नहीं ली गई।
शिकायत तंत्र पर सवाल
नए नियमों में शिकायत निवारण तंत्र, असमानता के खिलाफ कार्रवाई और वंचित वर्गों के समर्थन की बात कही गई है।
लेकिन विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि शिकायतों की जांच में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। इससे निर्दोष छात्र या शिक्षक फंस सकते हैं।
छात्रों की मुख्य आपत्ति
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये नियम एकतरफा हैं और इससे नया भेदभाव पैदा होगा। उनका कहना है कि समानता के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सरकार और UGC की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। छात्रों की मांग है कि नियमों को वापस लिया जाए।
अब देखना होगा कि सरकार इस बढ़ते विरोध पर क्या फैसला लेती है और क्या छात्रों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।




