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यूपी के चर्चित नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी छोड़ी, बताई वजह…

स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) उत्तर प्रदेश के ऐसे नेता हैं, जो लगातार अपने विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में बने रहते हैं।

UP Leader Swami Prasad Maurya Left SP: स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) उत्तर प्रदेश के ऐसे नेता हैं, जो लगातार अपने विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में बने रहते हैं।

मौर्य ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और प्रमुख ओबीसी नेता मौर्य 2022 में सपा में शामिल हुए और फाजिलनगर से विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) लड़े थे लेकिन जीत नहीं सके।

मौर्य ने पिछले हफ्ते पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था और नेतृत्व पर उनके साथ भेदभाव करने और उनकी टिप्पणियों पर उनका बचाव नहीं करने का आरोप लगाया था। मौर्य ने रामचरितमानस और अयोध्या मंदिर प्रतिष्ठा समारोह पर विवादित बयान दिया था। एमएलसी पद भी उन्होंने छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि मैं स्वच्छ राजनीति में विश्वास करता हूं… अलग होने के पीछे का कारण वैचारिक मतभेद है। मेरे Akhilesh Yadav और समाजवादी पार्टी (SP) के साथ वैचारिक मतभेद रहे हैं…मैंने अखिलेश को देखा, वह समाजवादी विचारधारा के खिलाफ जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे मुलायम सिंह यादव के साथ भी काम करने का अनुभव है। वे कट्टर समाजवादी नेता थे। जो लोग उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, वे उनकी विचारधारा पर नहीं चल पा रहे हैं।

मौर्य ने राम लला के प्राण प्रतिष्ठा (अभिषेक) समारोह पर सवाल उठाकर कहा था कि जब हजारों वर्षों से अयोध्या में भगवान राम की पूजा की जाती रही है, तब अभिषेक समारोह 22 जनवरी को करोड़ों रुपये खर्च करने की क्या जरूरत है। मौर्य पांच बार विधान सभा सदस्य, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री, सदन के नेता और विपक्ष के नेता (2012-17) भी रहे हैं। जब वह बसपा में थे। वह 2017 और 2022 के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार में श्रम मंत्री थे और पिछले विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी।

स्वामी प्रसाद मौर्य नई पार्टी बना सकते हैं। उनके पोस्ट के मुताबिक, मौर्य ने नई पार्टी का नाम और झंडा लांच किया है। वह 22 फरवरी को दिल्ली के Talkatora Stadium में रैली को संबोधित करने वाले है। नई पार्टी का नाम राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी होगा। इसके झंडे में नीला, लाल और हरा रंग होगा। इसके बाद से वह अखिलेश पर निशाना भी साध रहे हैं।

अखिलेश को लेकर उन्होंने कहा कि वह राज्य या केंद्र में सत्ता में नहीं हैं। वह कुछ भी देने की स्थिति में नहीं है। और अब तक उसने मुझे जो कुछ दिया है, वह सब मैं लौटा दूँगा। उन्होंने कहा कि मेरे लिए विचारधारा महत्वपूर्ण है, पद नहीं। सभी वर्गों का अधिकार एवं कल्याण मेरी प्राथमिकता (Priority) है। जब भी उस पर हमला होगा, मैं आवाज उठाऊंगा।

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