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जब पाकिस्तानी विमानों से रांची में बम गिरने की आशंका में डरे रहते थे लोग

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नवेन्दु उन्मेष

वर्ष 1971 की बात है। भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान में घुस चुकी थी। तब मैं छोटा था। एक दिन मेरे दरवाजे पर मोहल्ले के कुछ लोग आए और उन्होंने बताया कि शाम ढलते ही घर में घुस जाना है। रांची के पुलिस लाइन से जब सायरन बजेगी तो घर के लालटेन बुझा देने हैं। तब रातू रोड के अधिकांश इलाके में बिजली नहीं आई थी। मेरे घर में भी लालटेन जला करता था। प्रत्येक दिन रांची के पुलिस लाइन से सायरन बजते ही मोहल्ले के लोग अपने घर का लालटेन बुझा दिया करते थे। यहां तक कि घर के अंदर चले जाते थे। इसकी वजह यह बताई जाती थी कि रांची में एचईसी कारखाना है, जिसमें तोप बनाई जाती है। इस वजह से कभी भी पाकिस्तानी सैनिकों के विमान रांची में बम गिरा सकते हैं। भारत और पूर्वी पाकिस्तान के बीच युद्ध जारी था कि कुछ दिनों के बाद कुछ लोग ढोल बजाते हुए और बांग्ला गीत गाते हुए मेरे मोहल्ले में आने लगे। पता चला कि यह लोग बांग्लादेश से भाग कर रांची आए हैं और सड़कों पर घूम-घूम कर भीख मांग रहे हैं। तब आकाशवाणी रांची से बांग्लादेश के समर्थन में मेरे पिता राम कृष्ण उन्मन की ओर से रचित गीत भी बजने लगे थे। एक दिन मुझे मेरे पिता थड़पखना स्थित देशप्रिय क्लब ले गए थे। वहां उनके द्वारा रचित गीत स्वर्ण बंग देश के जवान तुम बढ़े चलो और हिंद के जवानों जागो देश ने पुकारा है। रांची के बंगाली कलाकारों ने झूम करके गाया था। जब बांग्लादेश बन गया तो मेरे बड़े भाई को पता चला कि रांची के नामकुम में कुछ पाकिस्तानी सैनिको को कैद करके रखा गया है। उन्हें देखने के लिए हम दोनों साइकिल पर सवार होकर नामकुम के सैनिक छावनी गये। तब कांटा टोली के बाद कोई खास आबादी नहीं थी। रास्ते में सौ-पचास लोग साइकिल या रिक्शा पर आते-जाते दिखे। हम लोग बेझिझक सैनिक छावनी के अंदर चले गए कोई रोकने रोकने वाला नहीं था। वहां देखा कि लोहे के कटीले तारों के अंदर कुछ पाकिस्तानी सैनिक अपनी वर्दी में रखे गए हैं। वहां खड़े 10-12 लोग यह चर्चा कर रहे थे इन पाकिस्तानी सैनिकों ने रांची से पाकिस्तान तक जमीन खोदकर रास्ता बना लिया है जिसे भारतीय जवानों ने देखा है। इसमें सच्चाई क्या है बता नहीं सकता। कुछ दिनों के बाद पता चला कि नामकुम से पाकिस्तानी सैनिक वापस अपने देश भेज दिए गए। बांग्लादेश बनने के बाद एयर मार्शल करिअप्पा और जनरल अरोड़ा बारी पार्क मैदान में आए थे और लोगों को संबोधित भी किया था. उन्होंने बताया था कि किस प्रकार पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना। तब रांची के लोगों को भारत-पाकिस्तान युद्ध की खबरों के लिए आकाशवाणी रांची पर निर्भर करना पड़ता था। तब मेरे मोहल्ले के कई लोग कान में रेडियो लगाए उन खबरों को सुना करते थे।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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