
रांची: बोकारो की 18 वर्षीय युवती के सात महीने से लापता रहने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बोकारो एसपी को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान एसपी वर्चुअल माध्यम से जुड़े और अब तक की कार्रवाई की जानकारी दी। अदालत ने पूछा कि युवती की बरामदगी के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और उसे कब तक खोज लिया जाएगा।
सात महीने से लापता, मां ने लगाई गुहार
जानकारी के अनुसार, युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज किया गया था। युवती की मां ने बेटी की तलाश में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाई है।
छापेमारी और संदिग्ध की गिरफ्तारी
सुनवाई के दौरान बोकारो एसपी ने बताया कि युवती की तलाश में बोकारो और आसपास के इलाकों में कई जगह छापेमारी की गई है। एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। 11 दिसंबर 2025 को युवती के परिजन को एक फोन आया था, जिसमें कहा गया कि वह पुणे में है। इसके बाद पुलिस ने कॉल करने वाले युवक को दबोचा, जिसने पूछताछ में बताया कि युवती उसके एक दोस्त के पास पुणे में है।
पुलिस टीम को चकमा देकर फरार
पुलिस टीम युवती के पिता के साथ पुणे जाने की तैयारी कर रही थी, तभी संबंधित युवक उन्हें चकमा देकर फरार हो गया। अब तक युवती का पता नहीं चल सका है।
दो सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट देने का आदेश
हाईकोर्ट ने बोकारो एसपी को दो सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर मामले की ताजा स्थिति बताने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि युवती की सुरक्षित बरामदगी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

