एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा बासुकीनाथ धाम में किया जलाभिषेक

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दुमका: सावन के पहले सोमवार को एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा बासुकीनाथ (Baba Basukinath) को जलाभिषेक किया। श्रावणी मेला में 100217 श्रद्धालुओं ने बाबा पर जलार्पण किया।

जलार्पण काउंटर से 29532 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया। 131 डाक बम श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया। शीघ्र दर्शनम से 1870 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया।

शीघ्र दर्शनम कूपन से 05 लाख 61 हज़ार रुपये प्राप्त हुए। दान रशीद से 5353 रुपये प्राप्त हुए। चांदी का सिक्का 10 ग्राम के एक और पांच ग्राम के एक पीस की बिक्री हुई।

दान पेटी से 2,15,160 रुपये राशि प्राप्त हुआ। गोलक से 60,210 रुपये और 120 ग्राम चांदी प्राप्त हुआ। अन्य स्रोत से 10802 रुपये प्राप्त हुए।

सभी अपने कर्तव्यस्थल पर उपस्थित रहे

श्रावणी मेला (Shravani Mela) के पांचवें दिन पहले सोमवार को बासुकीनाथ धाम में हर-हर महादेव के नारे और केशरिया रंग में बाबा के भक्तों के अलावा नहीं कुछ दिखाई-सुनाई नहीं दे रहा था।

जलार्पण करने के लिए श्रद्धालु रात दो बजे से ही कतारबद्ध होने लगे थे। शिवगंगा में श्रद्धालुओं की तादाद काफी अधिक थी। भक्तों की प्रतीक्षा तड़के लगभग तीन बजे खत्म हुई और जलार्पण शुरू हुआ।

देर रात से ही मंदिर प्रांगण, मेला क्षेत्र और सीसीटीवी के माध्यम से हर गतिविधि पर डीसी रविशंकर शुक्ला नजर बनाए हुए थे।

DC ने प्रतिनियुक्त सभी दंडाधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हो, इसे सुनिश्चित करें।

सभी अपने कर्तव्यस्थल पर उपस्थित रहे। किसी भी स्थान पर श्रद्धालुओं को एकत्र नहीं होने देने का निर्देश दिया।

मेला क्षेत्र में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और सुरक्षा बल (magistrates and security forces) के जवान भी देर रात से ही अपने कर्तव्यस्थल पर उपस्थित रहकर श्रद्धालुओं की सेवा करते दिखे।

स्वास्थ्य विभाग की टीम सेवा में जुटी

सुरक्षा बल के जवान श्रद्धालुओं को कतारबद्ध कर रहे थे। साथ ही कतार में घुसपैठ नहीं हो इसे सुनिश्चित कर रहे थे। जलार्पण काउंटर पर एलईडी स्क्रीन भी लगाया गया है ताकि बाबा पर जलार्पण की लाइव तस्वीर वे देख सकें।

श्रावणी मेला के दौरान सिंह द्वार को श्रद्धालुओं का निकास द्वार बनाया जाता है। जिला प्रशासन के अधिकारी सिंह द्वार पर उपस्थित रहकर हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे।

स्वास्थ्य विभाग की टीम भी कर्तव्यस्थल पर उपस्थित रहकर श्रद्धालुओं की सेवा में जुटी थी। सभी श्रद्धालुओं को जरूरी दवाइयां भी दी जा रही थी।

सूचना सहायता कर्मी भी देर रात से ही ध्वनि विस्तारक यंत्र (Amplifier) के माध्यम से बिछड़ों को मिलाने कर कार्य कर रहे थे।

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