झारखंड हाई कोर्ट से पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही के तत्कालीन निजी सचिव को नहीं मिली राहत

CBI ने तत्कालीन विधायक भानु प्रताप शाही के खिलाफ 13 मार्च 2005 से 24 जुलाई 2009 की अवधि को चेक पीरियड मानते हुए उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कराया था

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रांची: झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) के न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी (Justice Gautam Kumar Chowdhary) की कोर्ट ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money Laundering Cases) में फंसे पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही (Bhanu Pratap Shahi) के तत्कालीन निजी सचिव उमाशंकर मालवीय की क्रिमिनल रिवीजन को खारिज कर दिया है।

ED की विशेष अदालत द्वारा 26 मार्च 2018 को उमाशंकर मालवीय की डिस्चार्ज पिटीशन (Discharge Petition) खारिज कर दिए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज

उल्लेखनीय है कि उमाशंकर मालवीय (Umashankar Malaviya) पर पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही के द्वारा अर्जित की गई करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति (Ill-Gotten Wealth) को मनी लॉन्ड्रिंग करने में सहयोग करने का आरोप है।

विजिलेंस थाने में तत्कालीन विधायक भानु प्रताप शाही की आय से अधिक संपत्ति को लेकर दर्ज कांड संख्या 9/ 2009 के आधार पर CBI ने एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

CBI ने तत्कालीन विधायक भानु प्रताप शाही के खिलाफ 13 मार्च 2005 से 24 जुलाई 2009 की अवधि को चेक पीरियड मानते हुए उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कराया था।

बाद में CBI की इसी प्राथमिकी के आधार पर ED ने भानु प्रताप शाही, उनके तत्कालीन OSD उमाशंकर मालवीय एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।

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