Latest Newsझारखंडप्रवेश पत्र न मिलने से परीक्षा से वंचित अभ्यर्थी, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

प्रवेश पत्र न मिलने से परीक्षा से वंचित अभ्यर्थी, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

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candidates Deprived of Examination: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा–2025 को लेकर बड़ी परेशानी सामने आई है।

परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले कई अभ्यर्थियों को समय पर प्रवेश पत्र नहीं मिल सका। इस वजह से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों पर परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।

आयोग की इस लापरवाही से नाराज अभ्यर्थियों ने न्याय की गुहार लगाते हुए High Court का दरवाजा खटखटाया है।

लगभग 40 प्रतिशत अभ्यर्थी हुए प्रभावित

अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग की ओर से प्रवेश पत्र जारी करने में गंभीर चूक हुई। बताया गया कि करीब 40 प्रतिशत पात्र अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र समय पर जारी नहीं किए गए।

इसके कारण वे Examination Center तक पहुंच ही नहीं सके और परीक्षा से वंचित रह गए। इस मामले में संजू कुमारी सहित अन्य अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है।

समय पर आवेदन और पात्रता के बावजूद मौका नहीं

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि सभी अभ्यर्थियों ने विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत समय रहते आवेदन किया था और सभी पात्रता शर्तों को भी पूरा किया था।

इसके बावजूद उन्हें परीक्षा में बैठने का अवसर नहीं दिया गया, जो उनके भविष्य के साथ अन्याय है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि गलती उनकी नहीं, बल्कि व्यवस्था की है।

ई-मेल आधारित प्रवेश पत्र प्रणाली रही विफल

याचिका के अनुसार, इस बार पहली बार Email id के आधार पर प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की व्यवस्था लागू की गई थी, जो पूरी तरह असफल साबित हुई।

न तो अभ्यर्थियों को समय पर SMS या ई-मेल से कोई सूचना मिली और न ही आयोग की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

कई मामलों में तो परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रवेश पत्र जारी किए गए, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

हाईकोर्ट से अभ्यर्थियों की मांग

अभ्यर्थियों ने High Court से मांग की है कि उनके पेपर-1 के प्रवेश पत्र तत्काल जारी किए जाएं। साथ ही पेपर-1 की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराई जाए।

इसके अलावा, उन्हें पेपर-2 की परीक्षा में शामिल होने का अवसर भी दिया जाए, ताकि उनके साथ हुआ नुकसान कुछ हद तक पूरा हो सके।

यह मामला न सिर्फ परीक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि तकनीकी बदलाव बिना तैयारी के लागू करने से छात्रों को कितना नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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