
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले दिए गए अपने आदेश में किसी भी तरह के बदलाव से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध निर्माण को किसी भी हालत में संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग खारिज
मामले में प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए 14 जनवरी को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। इस पर जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की ओर से अधिवक्ता कृष्ण कुमार ने कोर्ट में पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों की दलीलों को सुनने के बाद उनकी मांग को खारिज कर दिया।
14 जनवरी के आदेश को बताया अंतिम
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 14 जनवरी 2026 को दिए गए आदेश में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उस सुनवाई में प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण में पाए गए विचलन को हटाने का निर्देश दिया गया था। साथ ही खंडपीठ ने जेएनएसी को आदेश दिया था कि एक महीने के भीतर प्रतिवादियों द्वारा किए गए अवैध निर्माण को तोड़ा जाए।
अवैध निर्माण पर कोई राहत नहीं
प्रतिवादियों ने अपनी याचिका में भवनों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि अवैध निर्माण को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट का मानना है कि कानून का उल्लंघन कर बनाए गए निर्माण को हटाना ही होगा।
स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि अगली सुनवाई से पहले मामले में की गई कार्रवाई से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। इससे यह साफ हो सके कि जेएनएसी ने कोर्ट के निर्देशों का कितना पालन किया है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
इस पूरे मामले में अब अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि तब तक अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
यह मामला शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ एक कड़ा संदेश देता है और यह दिखाता है कि कानून के सामने कोई भी नियमों से ऊपर नहीं है।
