251 Dismissed followers Continue Their Protest: राजधानी रांची में लोकभवन के सामने 251 बर्खास्त अनुसेवक (Dismissed Assistant) लगातार 20 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं।
ये सभी अनुसेवक अपने समायोजन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अनुसेवकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शन कर रहे अनुसेवकों में प्रकाश कुमार सिंह, कंचन पांडेय, उमेश पासवान, मंदीप कुमार, विजय पासवान, लोकनाथ उरांव, सुरेंद्र सिंह और एनुल अंसारी सहित कई लोग शामिल हैं।
पलामू से पैदल मार्च कर पहुंचे रांची
धरना दे रहे अनुसेवकों ने बताया कि वे 3 जनवरी को पलामू से पैदल मार्च करते हुए रांची पहुंचे थे।
इसके बाद से ही वे लगातार आंदोलन (Agitation) कर रहे हैं और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन मजबूरी में किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है।
2017 में निकला था विज्ञापन, 2018 में हुई नियुक्ति
बर्खास्त अनुसेवकों के अनुसार चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी (Fourth Class Employee) पद पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2017 में विज्ञापन जारी किया गया था।

इसके बाद 2017 में लिखित परीक्षा हुई और साल 2018 में सभी की नियुक्ति कर दी गई। नियुक्ति के बाद सभी 251 अनुसेवक 28 फरवरी 2025 तक सरकारी कार्यालयों में लगातार सेवा देते रहे।
बिना सूचना के कर दी गई बर्खास्तगी
अनुसेवकों का आरोप है कि 1 मार्च 2025 को बिना किसी पूर्व सूचना के सभी 251 अनुसेवकों को बर्खास्त कर दिया गया। इस अचानक लिए गए फैसले से सभी कर्मचारी और उनके परिवार गहरे सदमे में हैं।
आंदोलन कर रहे लोगों ने यह भी बताया कि बर्खास्त किए गए अनुसेवकों में से दो कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
अनुसेवकों की प्रमुख मांगें
बर्खास्त अनुसेवकों ने अपनी मांगें साफ शब्दों में रखी हैं। उनका कहना है कि जब तक समायोजन नहीं किया जाता, तब तक पलामू जिले में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की तर्ज पर कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर समायोजन किया जाए।
दो मृतक अनुसेवकों के परिवार को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने और सभी 251 अनुसेवकों को बिना शर्त समायोजित करने की मांग भी की गई है।
अनुसेवकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आमरण अनशन जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे।




