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स्वच्छता निरीक्षक को हाईकोर्ट से राहत, बर्खास्तगी और वेतन वसूली का आदेश रद्द

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High Court Gives Relief to Sanitation Inspector : झारखंड हाईकोर्ट ने गिरिडीह नगर निगम (Giridih Municipal Corporation) के एक स्वच्छता निरीक्षक के मामले में अहम फैसला सुनाया है।

Court ने नगरिय प्रशासन निदेशालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें निरीक्षक को सेवा से बर्खास्त करने, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और नौकरी के दौरान मिले वेतन की रिकवरी का निर्देश दिया गया था।

साथ ही अदालत ने आदेश दिया है कि सेवा से हटाए जाने की अवधि का वेतन, प्रमोशन सहित अन्य सभी देय लाभों का भुगतान किया जाए।

हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता अजीत कुमार राय की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।

कोर्ट का मानना था कि विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी का आदेश सही आधार पर नहीं दिया गया था, इसलिए उसे रद्द किया जाना जरूरी है।

क्या थे आरोप

अजीत कुमार राय पर यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी सेवा पुस्तिका में छेड़छाड़ की है।

जांच समिति ने उनकी सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े किसी भी तरह के फर्जी दस्तावेज या सबूत नहीं पाए। न ही यह साबित हो सका कि यह जानकारी खुद अजीत कुमार राय ने उपलब्ध कराई थी।

विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी

इन आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके बाद 20 अक्टूबर 2021 को नगरिय प्रशासन निदेशालय के तत्कालीन निदेशक द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

वेतन वसूली का आदेश भी रद्द

बर्खास्तगी के साथ ही उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और 2 सितंबर 1989 से सेवा अवधि के दौरान दिए गए वेतन की रिकवरी का आदेश भी दिया गया था। इस आदेश को अजीत कुमार राय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई High Court के न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में हुई। कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखते हुए साफ कहा कि बिना ठोस सबूत के इतनी बड़ी कार्रवाई करना उचित नहीं है।

छात्र की नजर से

यह फैसला दिखाता है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले सही जांच और पुख्ता सबूत जरूरी होते हैं। कोर्ट का यह निर्णय कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने वाला माना जा सकता है।

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