Important decision of Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए बोकारो Family Court के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें पति के पक्ष में दांपत्य अधिकार बहाली का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल पति के अधिकार नहीं, बल्कि पत्नी की सुरक्षा और हालात को भी गंभीरता से देखना जरूरी है।

फैमिली कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि Family Court ने पत्नी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया।
अदालत के अनुसार, यदि पत्नी ने पति और उसके परिवार पर उत्पीड़न, मारपीट या जान के खतरे जैसे आरोप लगाए हैं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला पति द्वारा मुस्लिम कानून की धारा 281 के तहत पत्नी को साथ रहने का आदेश दिलाने से जुड़ा था। पति का कहना था कि पत्नी बिना किसी वैध कारण के मायके चली गई।
वहीं, पत्नी ने आरोप लगाया कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और उसकी जान को खतरा था। इसी आधार पर उसने महिला थाने में FIR भी दर्ज कराई थी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
High Court की पीठ ने कहा कि यदि पति का व्यवहार पत्नी के लिए असुरक्षित या अन्यायपूर्ण है, तो दांपत्य अधिकार बहाली का आदेश नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
पत्नी की सुरक्षा को प्राथमिकता
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि दांपत्य अधिकार बहाली जैसे आदेश देते समय पत्नी की सुरक्षा, सम्मान और परिस्थितियों को सर्वोपरि रखना होगा।
इसी आधार पर पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया गया।




