स्मृति शेष : रांची के साहित्य प्रेमी व्यवसायी थे हनुमान सरावगी

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नवेन्दु उन्मेष

आज ज्यादातर लोग रांची के प्रसिद्ध व्यवसायी रहे हनुमान प्रसाद सरावगी के बारे में नहीं जानते। हनुमान सरावगी ने 1949 रांची जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। उस वक्त पटना विश्वविद्यालय बिहार और नेपाल के स्कूली छात्रों की मैट्रिक की परीक्षा आयोजित किया करता था। सरावगी जी के स्कूली सहपाठियों में कविवर रामकृष्ण उन्मन, पूर्व एमएलसी नागरमल मोदी के सुपुत्र रामस्वरूप मोदी, पूर्व मंत्री बंदी उरांव, एचईसी के पूर्व अधिकारी एसके लाल, ओडिशा के मुख्य अभियंता नागभूषण पट्टनायक, बिहार अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सिद्दीकी आदि शामिल हैं। हनुमान सरावगी मुख्य रूप से एक व्यवसायी थे। 1956 बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का अधिवेशन जब रांची के बारी पार्क मैदान में आयोजित किया गया तो उसके आयोजन मंडल में वे शामिल थे।

यहां तक कि व्यंग्य कथाकार राधाकृष्ण के सम्मान एक ग्रंथ का प्रकाशन किया गया तो रांची जिला स्कूल परिसर में एक समारोह का आयोजन किया गया जिसमें कुछ आर्थिक मदद हनुमान सरावगी ने की थी। वे एक साहित्यिक विचारधारा के व्यक्ति थे और समय मिलने पर अपने साहित्यिक मित्रों से मिलने के लिए अकसर उनके आवास पर मिलने के लिए आया करते थे। जेपी आंदोलन के बाद देश में जनता पार्टी का गठन किया। इसके बाद 1977 लोक सभा चुनाव हुआ। रांची से केरल निवासी रवींद्र वर्मा को जनता पार्टी ने लोक सभा सीट का प्रत्याशी बनाय।

रवींद्र वर्मा को रांची लोकसभा सीट से चुनाव जिताने में भी हनुमान सरावगी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रवींद्र वर्मा जब पहली बार चुनाव लड़ने के लिए रांची आये तो उनके रहने और खाने-पीने की व्यवस्था हनुमान सरावगी ने की थी। उनके चुनाव अभियान में सरावगी शामिल भी होते थे। सरावगी के सहयोग से रविंद्र वर्मा रांची की लोकसभा सीट जीत गये। बाद में वे मोरारजी देसाई की सरकार में श्रम मंत्री बनाये गये। इसका लाभ हनुमान सरावगी ने खूब उठाया। इसके बाद अपने व्यवसाय को उन्होंने देश-विदेश में फैलाया।

बताया तो यह भी जाता है श्री वर्मा के सहयोग के कारण सरावगी को विदेशों में ठेका और सामग्री निर्यात का काम मिला। साठ के दशक में साहित्यकार शिवचंद्र शर्मा ने रांची में अखिल भारतीय शोध मंडल की स्थापना की थी। 1961-62 में शोध मंडल का बिहार स्तरीय सम्मेलन के आयोजन में उनका योगदान था।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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