
नई दिल्ली : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों से आने वाली एलएनजी (LNG) की सप्लाई में आई बाधा को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ‘प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026’ जारी कर दिया है। इस नए आदेश का सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा, क्योंकि सरकार ने घरों में आने वाली पाइप गैस (PNG) और गाड़ियों की सीएनजी (CNG) को सप्लाई में पहली प्राथमिकता पर रखा है।
यह आदेश ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ के तहत जारी किया गया है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आने वाले गैस जहाजों की आवाजाही पर संकट मंडरा रहा है। भारत अपनी जरूरत की अधिकांश गैस इसी रास्ते से मंगवाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस की कमी का असर आम जनता की रसोई और सफर पर न पड़े, इसके लिए प्राथमिकता की चार श्रेणियां बनाई गई हैं:
पहली प्राथमिकता : घरों की पीएनजी, गाड़ियों की सीएनजी और एलपीजी सिलेंडर बनाने वाली इकाइयों को उनकी पिछली औसत खपत का पूरा 100 प्रतिशत कोटा मिलता रहेगा।
दूसरी प्राथमिकता : खेती के लिए खाद (फर्टिलाइजर) बनाने वाले प्लांट को रखा गया है। उन्हें उनकी जरूरत का 70 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा ताकि फसलों के लिए खाद की कमी न हो।
तीसरी और चौथी प्राथमिकता : चाय बागानों और छोटे उद्योगों को उनकी औसत खपत का 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जाएगा।
