
Big Scam in Rural Development Department : झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच में बताया है कि चार मुख्य अभियंताओं के कार्यकाल में कुल 3048 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए।
इन टेंडरों में करीब 3% की दर से लगभग 90 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में वसूले गए। इस पूरे मामले का खुलासा ईडी द्वारा दाखिल पांचवें आरोप पत्र में किया गया है।
कई इंजीनियर और अधिकारी बने आरोपी
ईडी ने पीएमएलए की विशेष अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग और कमीशनखोरी से जुड़े इस मामले में पांचवां आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में 14 इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया है।
इससे पहले कुल 22 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हो चुका था। अब इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है, जिसमें मुख्य अभियंता से लेकर सहायक अभियंता तक के अधिकारी शामिल हैं।
कमीशन बांटने का तय था पूरा सिस्टम
जांच में यह भी सामने आया है कि विभाग में कमीशन बांटने का एक तय सिस्टम था। टेंडर की राशि का 3% हिस्सा कमीशन के रूप में लिया जाता था।
इसमें मंत्री का हिस्सा 1.35%, विभागीय सचिव का 0.75%, मुख्य अभियंता का 0.50% और अन्य अधिकारियों का 0.40% तय था। बताया गया कि मंत्री का हिस्सा उनके आप्त सचिव संजीव लाल के माध्यम से इकट्ठा किया जाता था।
अलग-अलग कार्यकाल में हुए करोड़ों के टेंडर जारी
ईडी के अनुसार, मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के कार्यकाल में 2014-15 के बीच 492 करोड़ और 2021-23 के बीच 650 करोड़ रुपये के टेंडर जारी हुए। वहीं, राजीव लोचन के समय जुलाई 2023 से अक्टूबर 2023 तक 650 करोड़ रुपये के टेंडर निकाले गए।
मुख्य अभियंता सिंगारी टूटी के कार्यकाल (जनवरी 2023 से नवंबर 2023) में 600 करोड़ और प्रमोद कुमार के कार्यकाल (दिसंबर 2023 से मई 2024) में 350 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए।
संपत्ति जब्त, जांच जारी
जांच के दौरान यह भी पता चला कि कमीशन की रकम से संपत्ति खरीदी गई। अब तक करीब 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
ED ने कई लोगों के नाम आरोपियों की सूची में शामिल किए हैं, जिनमें इंजीनियर, ठेकेदार और अन्य सहयोगी शामिल हैं। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
