
नई दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार की ओर से इस सप्ताह संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाए जाने को पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में फायदा हासिल करने का प्रयास करार दिया। सोनिया ने कहा कि असल मुद्दा प्रस्तावित परिसीमन है, जो ‘खतरनाक’ तथा ‘संविधान पर हमला’ है। उन्होंने अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ के लिए लिखे लेख में यह भी कहा कि लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि से संबंधित कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से होना चाहिए। उन्होंने ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक लेख में यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की असल मंशा जाति आधारित जनगणना को और ‘‘टालने तथा उसे पटरी से उतारने’’ की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पारित कराना चाहती है, जबकि उस समय तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इस जल्दबाजी की केवल एक ही वजह हो सकती है और वह है राजनीतिक लाभ लेना तथा विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में डालना।’’ गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह पूरा सच नहीं बता रहे।
उन्होंने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में विशेष सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ सर्वसम्मति से पारित किया था और इस कानून के तहत संविधान में अनुच्छेद 334-ए जोड़ा गया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि यह अगली जनगणना और जनगणना आधारित परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होना था।

