
नयी दिल्ली: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को रविवार को पत्र लिखकर दावा किया कि ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना वहां के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र को ‘‘नष्ट’’ कर देगी। रमेश ने यादव से परियोजना के मौजूदा स्वरूप की पुन: समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 1 मई को सरकार ने ‘ग्रेट निकोबार परियोजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ जारी कर दावा किया था कि परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया गया है और उन्हें प्रभावी तरीके से मैनेज किया जा रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने 3 मई को इन पूछे जाने वाले प्रश्न का जवाब दिया था, लेकिन अब वे कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखना चाहते हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि कानून के मुताबिक अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बनने वाले बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए व्यापक ईआईए जरूरी होता है। इसके तहत कम से कम तीन मौसमों का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि पर्यावरण और जैव विविधता पर पड़ने वाले असर का सही आकलन हो सके। उन्होंने 3 नवंबर 2009 के पर्यावरण मंत्रालय के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला देते हुए कहा कि 5 मिलियन टन प्रति वर्ष से बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए व्यापक ईआईए, गणितीय मॉडलिंग और जमीनी सत्यापन अनिवार्य है।
जयराम रमेश ने कहा कि मंत्रालय की क्षेत्र-विशिष्ट ईआईए नियमावली भी कम से कम दो मौसमों के भौतिक, रासायनिक और जैविक आधारभूत डेटा की मांग करती है। उन्होंने दावा किया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में इन मानकों का पालन नहीं किया गया।

