
नई दिल्ली : अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के सैन डिएगो में सोमवार को एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। यहां स्थित सैन डिएगो इस्लामिक सेंटर (मस्जिद) में दो किशोरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें मस्जिद के सुरक्षा गार्ड समेत तीन लोगों की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों हमलावरों ने मस्जिद से कुछ दूरी पर जाकर एक गाड़ी में खुद को भी गोली मार ली। स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की जांच घृणा अपराध (हेट क्राइम) के दृष्टिकोण से कर रही है।
सैन डिएगो के पुलिस प्रमुख स्कॉट वॉल ने मस्जिद के पास एक पार्क में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम चार मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस प्रमुख के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 9:40 बजे एक किशोर हमलावर की मां ने पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने बताया था कि उनका बेटा अपनी गाड़ी और कई खतरनाक हथियारों के साथ लापता है। पुलिस मां से मिली इस जानकारी के आधार पर घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। दोनों हमलावर मैडिसन हाई स्कूल के छात्र थे, जो इस इस्लामिक सेंटर से महज एक मील की दूरी पर स्थित है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के नामों का खुलासा नहीं किया है। इस हमले में जान गंवाने वालों में मस्जिद का सुरक्षा गार्ड भी शामिल है। पुलिस प्रमुख स्कॉट वॉल ने बताया कि सुरक्षा गार्ड ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक नायक की तरह काम किया। उसने स्थिति को और बिगड़ने से रोका, जिससे वहां मौजूद कई लोगों की जान बच गई। सैन डिएगो इस्लामिक सेंटर इस क्षेत्र की सबसे बड़ी मस्जिद है, जिसके परिसर में अल राशिद स्कूल भी संचालित होता है। यहां पांच साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों को अरबी भाषा और इस्लामिक अध्ययन की शिक्षा दी जाती है। पुलिस के मुताबिक, हमले के दौरान स्कूल के सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित रहे। हमलावरों ने भागते समय एक माली पर भी फायरिंग की थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गया। मस्जिद के निदेशक इमाम ताहा हसन ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पूजा स्थलों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए।

