‘मां बनने के बाद लीड रोल नहीं मिलेंगे’: रुबीना दिलैक ने मदरहुड, शादी और इंडस्ट्री के दबाव पर की खुलकर बात

Manu Shrivastava
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टेलीविजन इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री रुबीना दिलैक ने अपने करियर, मदरहुड और वैवाहिक जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की। दो जुड़वा बेटियों की मां बनने के बाद भी रुबीना न सिर्फ प्रोफेशनल बल्कि पर्सनल लाइफ में भी संतुलन बनाए रखने की मिसाल पेश कर रही हैं। सोशल मीडिया पर अपने ग्लैमरस और फिटनेस लुक्स के लिए चर्चा में रहने वाली रुबीना का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल आकर्षक दिखना नहीं, बल्कि स्वस्थ रहना है। उन्होंने कहा, “मैं किसी खास फिगर या शेप के लिए फिटनेस नहीं अपनाती। मेरी प्राथमिकता अपनी एनर्जी को बनाए रखना और बेहतर परफॉर्मेंस देना है। खूबसूरत दिखना इसका एक सकारात्मक परिणाम मात्र है।”

 

शादी में उतार-चढ़ाव के बावजूद नहीं छोड़ा साथ

 

रुबीना और उनके पति अभिनव शुक्ला का रिश्ता कई मुश्किल दौर से गुजरा है। अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी आया जब उनकी शादी टूटने की कगार पर पहुंच गई थी। हालांकि, दोनों ने अपने रिश्ते को संभालने का फैसला किया। रुबीना का मानना है कि फिल्मों में दिखाई जाने वाली प्रेम की कल्पना और वास्तविक जीवन का प्यार काफी अलग होता है। उन्होंने कहा, “प्यार हर दिन निभाया जाने वाला कमिटमेंट है। रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ता है। कई बार मैं हार मानने की बात करती थी, लेकिन अभिनव हमेशा धैर्य रखते थे और मुझे संभालते थे।” उन्होंने यह भी बताया कि जुड़वा बेटियों जीवा और ईधा की परवरिश में अभिनव का पूरा सहयोग मिला है। उनके अनुसार, बच्चों के पालन-पोषण में दोनों माता-पिता की समान भागीदारी बेहद जरूरी है।

 

मदरहुड के बाद करियर पर पड़ता है असर

 

मां बनने के बाद महिलाओं के करियर में आने वाली चुनौतियों पर भी रुबीना ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं के पास पर्याप्त सपोर्ट सिस्टम नहीं होने के कारण वे मातृत्व के बाद दोबारा काम शुरू नहीं कर पातीं। रुबीना ने बताया कि मनोरंजन जगत में भी अभिनेत्रियों को जज किया जाता है। “लोग कहने लगते हैं कि मां बनने के बाद उम्र दिखने लगी है या अब लीड रोल नहीं मिलेंगे। मुझसे भी कई लोगों ने कहा था कि मां बनने के बाद मुख्य भूमिकाएं मिलना मुश्किल हो जाएगा।” उन्होंने स्वीकार किया कि मातृत्व के बाद उनके हाथ से कई प्रोजेक्ट्स भी निकल गए। बावजूद इसके, उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। उनके अनुसार, डर और असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना जरूरी होता है।

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