Basant Panchami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरे देश में बसंत पंचमी (Basant Panchami) का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
यह दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विद्या, बुद्धि और कला की देवी Mother Saraswati प्रसन्न होती हैं और ज्ञान, स्मरण शक्ति व बुद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण बसंत पंचमी को शिक्षा और ज्ञान का पर्व कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताएं और महत्व
धार्मिक विश्वासों के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा के कमंडल से अमृत की बूंदों के पृथ्वी पर गिरने से मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस तिथि पर मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और पीले रंग को शुभ मानकर पीले वस्त्र धारण करते हैं।
छात्रों के लिए विशेष महत्व
बसंत पंचमी (Basant Panchami) विद्यार्थियों के जीवन में खास स्थान रखती है। इस दिन छात्र-छात्राएं मां सरस्वती के चित्र के सामने कलम और किताब रखकर पूजा करते हैं। हल्दी, रोली और अक्षत से पूजन के बाद उसी कलम से पढ़ाई या परीक्षा की तैयारी शुरू करने की परंपरा है।

माना जाता है कि इससे पढ़ाई में सफलता और एकाग्रता बढ़ती है।
स्नान, दान और सेवा का महत्व
इस पावन दिन पर स्नान और दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु संगम या नजदीकी पवित्र जल में स्नान कर मंत्र जाप करते हैं। जरूरतमंद छात्रों को कलम, कॉपी या शिक्षा से जुड़ी सामग्री दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
पीले वस्त्र और मंत्र जाप
Basant Panchami के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने और मां सरस्वती को पीले पुष्प, पीले फल और पीली मिठाई अर्पित करने की परंपरा है।
इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करने की सलाह दी जाती है।
शुभ मुहूर्त का समय
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन पूजा के लिए सुबह के समय शुभ माना गया है। पूजा के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं—
सुबह 7:13 बजे से 8:33 बजे तक
सुबह 8:33 बजे से 9:53 बजे तक
सुबह 9:53 बजे से 11:13 बजे तक
धार्मिक ग्रंथों में पूर्वाह्न काल, यानी सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले का समय, मां सरस्वती की पूजा के लिए सर्वोत्तम बताया गया है।
बसंत पंचमी न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति और सकारात्मक सोच से जुड़ा उत्सव भी है। यह दिन विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और सीखने की प्रेरणा देता है।




