
नयी दिल्ली: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और सरकार की विभिन्न नीतियों के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को रामलीला मैदान में ‘जन आक्रोश रैली’ की जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
इस रैली में शामिल लोगों ने तख्तियां ले रखी थीं जिनमें आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, रसोई गैस और ईंधन की कमी सहित अन्य मुद्दों का जिक्र था। गौरतलब है कि माकपा ने चार श्रम संहिताओं की अधिसूचना वापस लेने और हाल में लाए गए विकसित भारत-गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को रद्द करने की मांग की है।
वामपंथी दल ने बिजली अधिनियम में संशोधन न करने और वितरण कंपनियों के निजीकरण न करने की मांग की है। पार्टी ने बीज विधेयक में संशोधन का भी विरोध किया है और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग करते हुए कहा है कि यह ‘भारतीय किसानों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के हितों के घोर विरुद्ध’ है।
बेबी ने कहा कि जत्थों के दौरान, माकपा नेताओं को सीधे तौर पर लोगों की परेशानियों को समझने का मौका मिला।
माकपा महासचिव ने कहा कि उन्हें पश्चिम एशिया की स्थिति का ‘प्रत्यक्ष प्रभाव’ देखने को मिला, और बताया कि वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर में स्थित सामुदायिक रसोई एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण प्रभावित हो रही है।
बेबी ने कहा, ‘300 से अधिक वर्षों तक अन्नपूर्णा मंदिर द्वारा निर्बाध रूप से भोजन उपलब्ध कराया जाता रहा, और मंदिर के 300 वर्षों के इतिहास में पहली बार, उन्हें प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में मुफ्त भोजन सेवा बंद करनी पड़ी।’
उन्होंने कहा, ‘देश के विभिन्न हिस्सों से इसी तरह की खबरें आ रही हैं। विभिन्न प्रतिष्ठान और व्यवसाय प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे हैं, कई उद्योग आंशिक या पूर्ण रूप से बंद हो रहे हैं, छात्रावास बंद हो रहे हैं।’
