
विवेकानंद सिंह कुशवाहा
बिहार को बस एक साधारण राज्य मत समझिए। बिहार भारत की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, राजनीति और धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। बिहार की आर्थिक विपन्नता पर भी नहीं जाइये, बिहार की माटी के कण-कण में संघर्षशीलता के बीज पड़े हैं। मैं ऐसे ही यह बातें नहीं कह रहा, इतिहास से वर्तमान तक बिहार के पास वर्णन के लिए ऐसे तत्व विद्यमान रहे हैं, जो बिहार को अन्य प्रदेशों से थोड़ा भिन्न कर देता है।
– दुनिया की दो सबसे प्राचीनतम विश्वविद्यालय नालंदा और विक्रमशिला, बिहार में थे। नालंदा विश्वविद्यालय जहां दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था। वहीं, विक्रमशिला बौद्ध अध्ययन का केंद्र था।
– भारत को जिस बौद्ध धर्म की वजह से दुनिया में विश्वगुरु की उपाधि मिली, उस बौद्ध धर्म का उदय बिहार में हुआ। तथागत गौतम बुद्ध को बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई।
– जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर व असली संस्थापक महावीर का जन्म बिहार के वैशाली में हुआ। उसी वैशाली को दुनिया का पहला लोकतांत्रिक गणराज्य भी माना जाता है।
– मौर्य साम्राज्य का केंद्र मगध और उसकी राजधानी पाटलिपुत्र यानी बिहार रहा। चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक ने यहीं से शासन किया। यही वह शासनकाल था, जब भारत की सीमाएं ईरान तक फैली थीं।
– समुद्रगुप्त के समय गुप्तकाल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। इसके साथ यह चाणक्य, आर्यभट जैसे विद्वानों की भूमि मानी जाती है।
– सिख धर्म से 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पटना साहिब में हुआ था। उन्होंने ही खालसा पंथ की स्थापना की।
– महात्मा गांधी ने अफ्रीका से लौटने के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह की शुरुआत बिहार से की। चंपारण सत्याग्रह से अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह की जो मशाल जली, वह उनके जाने तक नहीं बुझी।
– संविधान सभा के अध्यक्ष बिहार के डॉ राजेंद्र प्रसाद रहे, जो बाद में देश के पहले राष्ट्रपति बने। उसके बाद से बिहार से दूसरे राष्ट्रपति का इंतज़ार हो रहा है।
– बिहार समाजवाद की धरती है। लोहिया, जयप्रकाश नारायण के आंदोलनों को और उनकी राजनीति को ऊंचाई बिहार के माटी ने दी।
– इनके संगी-साथियों ने एक समय तक देश की राजनीति को जिधर चाहा उधर मोड़ दिया। कर्पूरी, जगदेव, बीपी से लेकर लालू, नीतीश और रामविलास तक बिहार की राजनीति में ध्रुवतारा की तरह नेता हुए।
– जॉर्ज साहब, शरद जी, मधुलिमये तीनों बिहार के नहीं थे, लेकिन तीनों को बिहार ने बिहार के अन्य नेताओं से ज्यादा अपना माना। यह बिहार की माटी की खासियत है।
– बिहार लिबरेलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन की दौड़ में भले पीछे छूट गया हो, लेकिन आज देश में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में बिहार शामिल है। 13 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा बिहार जीडीपी रैंकिंग में देश में 14वें स्थान पर है।
– बिहार में बड़ी जोत की कृषि भूमि किसानों के पास नहीं हैं। इसके बावजूद बिहार मखाना, मशरूम और मक्का के उत्पादन में टॉप व टॉप 2-3 पोजिशन पर है। लीची और चावल उत्पादन में बिहार प्रमुख स्थान रखता है। बिहार के कुछ आमों की वेराइटी विश्व प्रसिद्ध है।
– बिहार का इंफ्रा सेक्टर एक समय तक बहुत खराब था, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की काया बहुत बदल चुकी है। सड़कों, पुलों और बिजली के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। बस अब रफ्तार पकड़ना बाकी है।
– शिक्षा के लिए संस्थान बन गये हैं, बस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी समस्या बनी हुई है। उसे जिस दिन ठीक कर दिया गया, बिहार के गौरव के दिन वापस लौटने लगेंगे।
– देश में सबसे ज्यादा महिला पुलिसकर्मी और पंचायत प्रतिनिधि बिहार में हैं। यहां की सरकारी नौकरियों में भी आधी आबादी की हिस्सेदारी बहुत तेजी से बढ़ी है। जिस राज्य में पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर महिलाएं काम करेंगी, उसे विकसित होने से कोई रोक ही नहीं सकता है।
– बिहारियों को एक समय तक लगता था कि पर्यटक जो एक बार यहां आया, दोबारा तो आयेगा नहीं, इसलिए उसको लूट लो। अब यह सोच बदली है। पर्यटक भी बिहार में बढ़े हैं। राजगीर और नालंदा जैसे स्थानों पर पर्यटक बढ़ रहे हैं। यह संभावना बिहार के हर हिस्से में हो सकती है। लोगों को खुद अपने क्षेत्र को प्रोमोट करना होगा और पर्यटकों से परिवार की तरह व्यवहार करना होगा। जो बिहारी कर सकते हैं।
– बिहार सिर्फ उगते सूर्य को नहीं, बल्कि डूबते सूरज को भी नमन करता है। यह सबक छठ से मिलता है। छठ एक ऐसा त्योहार है, जिसे कोई भी बिना किसी कर्मकांड के निष्पादित कर सकता है। यही कारण है कि हर वर्ष छठ का विस्तार ही हो रहा है।
– बढ़ता रहे हमारा बिहार, विकसित हो हमारा बिहार। जय बिहार। जय-जय बिहार।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
