
रांची : चतरा जिले के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिंधानी गांव में रविवार को हुई कथित पुलिस कार्रवाई को चतरा के एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सिमरिया एसडीपीओ सुमित खंडेलवाल को जिम्मेदारी सौंपी है।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गिद्धौर थाना की पुलिस ने एक छात्र को जबरन उठाने और उसे झूठे मादक पदार्थ के मामले में फंसाने की कोशिश की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 4 अप्रैल की सुबह करीब 11 बजे गिद्धौर थाना प्रभारी शिव यादव अपने तीन साथियों के साथ सादे लिबास में एक नीले रंग की बलेनो कार (नंबर: JH02BF3806) से बिंधानी गांव पहुंचे। वहां उन्होंने गांव के निवासी संदीप दांगी (पिता: दशरथ दांगी) को जबरन कार में बैठाकर ले जाने का प्रयास किया।
परिजनों द्वारा विरोध और आरोपों के बारे में पूछे जाने पर पुलिसकर्मियों ने बिना किसी ठोस साक्ष्य के संदीप पर अवैध मादक पदार्थ के कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाया। विरोध बढ़ने पर संदीप के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका सिर फट गया।
घटना के दौरान संदीप की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर जुटने लगे, जिसके बाद सभी आरोपी वहां से भाग निकले। इस घटना के बाद गांव में आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है।
संदीप दांगी ने आरोप लगाया है कि गिद्धौर थाना प्रभारी ने उससे पहले 10 लाख रुपये की मांग की थी। पैसे देने से इंकार करने पर उसे जबरन उठाने की कोशिश की गई।
संदीप दांगी एक प्रशिक्षु छात्र है और कोलकाता स्थित National Training Skill Institute, Howrah में CITS पाठ्यक्रम कर रहा है। वह चतरा में चल रही होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 20 मार्च को अपने गांव आया था।
पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल एक व्यक्ति के अधिकारों के संभावित उल्लंघन को दर्शाता है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी चिंता उत्पन्न करता है।
स्थानीय प्रशासन और उच्च अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था में बना रहे।
