
Comparative Literature Seminar : गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय संबलपुर के हिंदी विभाग के तत्वावधान में तुलनात्मक साहित्य : दशा और दिशा विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जंगबहादुर पांडेय ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य दो या अधिक भाषाओ, संस्कृतियों या विषयों के साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन है।
डॉ पांडेय ने कहा कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के साहित्य के बीच संबध स्थापित कर अनेकता में एकता को उजागर करता है। अर्थात् अनेकता में एकता का अन्वेषण तुलनात्मक साहित्य के अध्ययन का मुख्य प्रयोजन है। इस सत्र में डा जयंत कर शर्मा ने कहा कि तुलनात्मक साहित्य के लिए अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस सत्र में जिन वक्ताओं ने अपने उद्बोधन से संगोष्ठी में चार चांद लगाया उनमें शांति निकेतन के डा मनोरंजन प्रधान एवं डॉ शरत कुमार जेना, कटक के डॉ गिरीश चंद्र मिश्र, डॉ अभिषेक शर्मा, डॉ चक्रधर प्रधान,डा प्रदीप पंडा,डा मीना सोनी, डा गायत्री बुडा, डा जतिन द्वारी आदि के नाम प्रमुख हैं।
आगत अतिथियों का स्वागत डा दाशरथी बेहेरा एवं डा रंजन कुमार सेठी ने, कुशल संचालन डा स्मृति स्मरणिका जेना और धन्यवाद ज्ञापन विकास भोई ने किया।भोजनोपरांत समापन सत्र का आयोजन हुआ। कतिपय छात्र छात्राओं ने संगोष्ठी के संदर्भ में अपनी अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं।
इस सत्र को डा जयंत कर शर्मा, डा चक्रधर प्रधान, डा मुरारी लाल शर्मा एवं डा अभिषेक शर्मा ने अपने आशीर्वाद से अभिसिंचित किया। डा जे बी पाण्डेय ने डा दाशरथी बेहेरा, डा प्रणति बेहेरा, डा स्मृति स्मरर्णिका जेना, डा अभिषेक शर्मा, डा मीना सोनी,डा चक्रधर प्रधान, डा जयंत कर शर्मा, डा रंजन कुमार सेठी को उनकी हिंदी सेवाओं के लिए हिंदी रत्न सम्मान तथा अटल बिहारी साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया, जिसका करतल ध्वनि से दर्शको ने अनुमोदन किया।
तदुपरांत संगोष्ठी के विषय विशेषज्ञों को उनकी सहभागिता का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। डा मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डा जंग बहादुर पाण्डेय ने संगोष्ठी की सफलता की कामना करते हुए कहा कि मिले सदा शुभ हर्ष आपको, नहीं कभी आये अपकर्ष। सतत् सुधा साहित्य प्रवाहित, लिखे लेखनी यश उत्कर्ष।
संगोष्ठी का श्रीगणेश विश्वविद्यालय के कुलगीत से और समापन राष्ट्र गीत से हुआ।
