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भारत में Covishield Vaccine लेने वाले 1 अरब 70 करोड़ लोगों पर मंडरा रहा खतरा, जानिए वैक्सीन की सच्चाई

एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया है कि उसके द्वारा बनाए गए वैक्सीन से लोगों को कुछ साइड इफेक्ट्स (Side Effects) हो सकते हैं।

Covishield Vaccine Side Effect : साल 2020 में कोरोना (Corona) ने पूरी दुनिया को तबाह करने की स्थिति में ला दिया था। लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी इसे ध्यान में रखते हुए कोरोना रोधी वैक्सीन (Anti-Corona Vaccine) का इंतजाम किया गया।

दुनिया की कई कंपनियों ने कोविड वैक्सीन (Covid vaccine) बनाया था।

उन्हीं में से एक कंपनी एस्ट्राजेनेका (Astra Zeneca) थी। एस्ट्राजेनेका जिसने कोविशील्ड (Covid Shield) नामक कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) का निर्माण किया था ने स्वीकार किया है कि उसके द्वारा बनाए गए वैक्सीन से लोगों को कुछ साइड इफेक्ट्स (Side Effects) हो सकते हैं।

कंपनी ने कहा है कि इससे खून के थक्के जमने (Blood Clotting) की संभावना है।

कंपनी ने यह भी कहा है कि टीका लगवाने के बाद इंजेक्शन लगने वाली जगह पर सूजन या लाल होना, बुखार आना, उल्टी या दस्त होना, हाथ-पैर में दर्द या तेज बुखार, गले में खराश, नाक बहने, खांसी या कंपकंपी जैसे लक्षण भी आ सकते हैं।

गौरतलब है कि भारत में 1 अरब 70 करोड़ डोजेज Covid Shield के लगाए गए थे।

भारत में 93 प्रतिशत लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया है। कोविड वैक्सीन को मॉनिटर करने वाली ऐप Cowin की डेटा के अनुसार AEFI के मामले 0.007% हैं

इन डोजेज में 1 अरब 70 करोड़ डोजेज कॉविशील्ड के लगे हैं।

निया में एस्ट्रेजनेका के 2 अरब 50 करोड़ से ज़्यादा डोजेज लगाए गए हैं, लेकिन 2021 में ही यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने 222 लोगों में एस्ट्रेजनेका की वजह से ब्लड क्लोटिंग की बात कही थी।

मसलन उस वक्त लाख में 1 को खतरा था। वो भी यूरोपीय देशों में। भारत की जानकारी में भी ब्लड क्लोटिंग की बात थी और नजर और निगरानी इस पर रखी गई, लेकिन फायदा का आंकड़ा बहुत बड़ा था और नुकसान नगण्य है।

रक्त के थक्का बनने का खतरा

रक्त के थक्का बनने की स्थिति को थ्रोम्बोसिस कहते हैं और यह शरीर के किसी भी जगह पर हो सकती है जैसे नसें, आर्टरीज या दिल के अंदर। इसकी वजह से शरीर के अंगों में ठीक तरह से ब्लड फ्लो (Blood Flow) नहीं हो पाता है।

Blood Clotting) से बचने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव किये जा सकते हैं। थ्रोम्बोसिस के कारण हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और प्लेटलेट्स गिरने का खतरा बढ़ जाता है।

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