गणगौर पर्व सौभाग्य और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम: संजय सर्राफ

गणगौर 2026: 21 मार्च को मनाया जाएगा शिव-पार्वती को समर्पित पर्व। जानें इसका महत्व, पूजा विधि, मारवाड़ी परंपरा और संजय सर्राफ का बयान।

Archana Ekka
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Jharkhand Provincial Marwari Conference : झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक होते हैं।

इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है गणगौर, जो विशेष रूप से राजस्थान और मारवाड़ी समाज में बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गणगौर पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। इस वर्ष गणगौर पर्व 21 मार्च दिन शनिवार को मनाया जाएगा। गणगौर पर्व भगवान शिव (गण) और माता पार्वती (गौर) को समर्पित है।

यह पर्व मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति के दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए तथा अविवाहित कन्याओं द्वारा योग्य वर की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। “गण” का अर्थ शिव और “गौर” का अर्थ पार्वती है, इसलिए यह पर्व शिव-पार्वती के अटूट दांपत्य प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।गणगौर उत्सव होली के दूसरे दिन से प्रारंभ होकर लगभग 16 दिनों तक चलता है।

इस दौरान महिलाएं प्रतिदिन माता गौरी की पूजा करती हैं, सुंदर गीत गाती हैं और मिट्टी या लकड़ी की बनी गणगौर प्रतिमाओं को सजाती हैं। अंतिम दिन शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें सजी-धजी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गणगौर की प्रतिमाओं को जल में विसर्जित करती हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाया। विवाह के बाद माता पार्वती ने पृथ्वी पर आकर स्त्रियों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया।

तभी से महिलाएं गणगौर पर्व मनाकर माता गौरी से अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।एक अन्य कथा के अनुसार, माता पार्वती ने साधारण स्त्रियों को अपनी सच्ची भक्ति के कारण विशेष आशीर्वाद दिया, जिससे यह पर्व सामाजिक समानता और नारी शक्ति का भी प्रतीक बन गया। गणगौर पर्व का मुख्य उद्देश्य वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण को मजबूत करना है। यह पर्व नारी शक्ति, त्याग और धैर्य का प्रतीक है।

साथ ही यह समाज में सांस्कृतिक एकताऔर पारंपरिक मूल्यों को सहेजने का संदेश देता है। मारवाड़ी समाज में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है, जहां लोकगीत, नृत्य और सामूहिक आयोजन इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

गणगौर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान और उसकी भावनाओं को भी अभिव्यक्त करता है।

गणगौर पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराओं का प्रतीक है, जो प्रेम,श्रद्धा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। यह त्योहार हर वर्ष लोगों के जीवन में नई आशा, सुख और सौभाग्य लेकर आता है तथा हमारी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाता है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।