OMG! झारखंड में यहां भाई-बहन ने आपस में की शादी, फिर थाने में कर दिया सरेंडर ; पढ़ें चौंका देने वाली खबर

धनबाद: यूं तो दुनियाभर में कई ऐसी बातें होती हैं जिन पर हम आसानी से यकीन नहीं कर पाते।

 लेकिन इस बार ऐसा मामला सामने आया है जिस पर आसानी से यकीन तो आता ही नहीं साथ ही इसकी वजह जानकर और ताज्जुब होता है।

जी हां ख़बरों की मानें तो जिले के ताेपचांची थाना क्षेत्र के रहने वाले युवक-युवती ने शुक्रवार काे शादी कर महिला थाने में सरेंडर कर दिया।

दोनों भाई बहन को एक-दूसरे से प्यार हुआ तो मंदिर में जाकर शादी रचा ली।

दाेनाें एक ही गांव के हैं और रिश्ते में भाई-बहन हैं।

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सरेंडर करने के बाद पुलिस को पता चला कि तोपचांची थाने में युवक के खिलाफ थाना युवती काे शादी करने की नीयत से अगवा करने की प्राथमिकी दर्ज है।

पुलिस ने दाेनाें काे हिरासत में रखा है। 25 जनवरी काे दाेनाें घर से भाग गए थे।

शादी के बाद दोनों का घर में या रिश्तेदारी में जाना संभव नहीं था।

शादी कर दाेनाें ने 29 जनवरी काे महिला थाने में सरेंडर कर दिया।

पुलिस के मुताबिक दाेनाें बालिग हैं, लेकिन प्राथमिकी के कारण युवक काे हिरासत में लिया गया है।

यह खबर हर किसी के जुबान पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

इस भाई-बहन के बारे में जिसने भी सुना, हैरान रह गया और सोच में पड़ गया कि एक छोटे से फायदे के लिए कोई इंसान किस हद तक गिर सकता है।

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जानिए, क्या कहता है कानून, रिश्ते के भाई-बहन क्या आपस में शादी कर सकते हैं? 

ऐश्वर्या और श्रीहरि हिंदू थे। हिंदुओं की शादियों से जुड़े नियम-कानून हिंदू विवाह अधिनियम 1955 में लिखे हैं।  इस कानून के तहत हिंदू विवाह के लिए जरूरी शर्तें  धारा-5 में बताई गई हैं। ये हैं-

पहली शर्त – कोई भी हिंदू विवाह तभी संपन्न माना जाएगा, जब दोनों पक्ष यानी दूल्हा-दुल्हन हिंदू होंगे। इसके लिए किसी जाति विशेष की आवश्यकता नहीं है।

दूसरी शर्त –  हिंदू विवाह तभी पूरा माना जाएगा, जब विवाह के समय दोनों पक्ष में से न तो दूल्हे की कोई पत्नी हो और न ही दुल्हन का कोई पति हो।

तीसरी शर्त – विवाह की सहमति देने के लिए दूल्हा और दुल्हन की मानसिक स्थिति संतुलित होनी चाहिए।

चौथी शर्त – विवाह के समय दूल्हे की उम्र कम से कम 21 वर्ष और दुल्हन की उम्र 18 वर्ष होनी अनिवार्य है।

पांचवीं शर्त – दोनों पक्षकारों के बीच प्रतिषिद्ध नातेदारी का संबंध नहीं होना चाहिए।

प्रतिषिद्ध नातेदारी को सरल भाषा में कहें, तो ब्लड रिलेशन में शादी की मनाही। यानी दोनों पक्षों का रिश्ता भाई-बहन, चाचा-भतीजी, मामा-भांजी, फूफी-भतीजा, मौसी-भांजे आदि का नहीं होना चाहिए।

इसी अधिनियम की धारा-11 में कहा गया है कि अगर पक्षकारों में कोई भी निषिद्ध नातेदारी पाई जाती है, तो विवाह को अमान्य घोषित किया जा सकता है।

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लेकिन, साल 1970 में कामाक्षी बनाम के मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी प्रथा के अधीन प्रतिषिद्ध नातेदारी में विवाह को मान्यता प्राप्त है और यह प्रचलन पहले से चला आ रहा है, तो ऐसे विवाह पर इस अधिनियम की धारा-5 की शर्तें लागू नहीं होती हैं।

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दूसरे धर्म में शादी के लिए क्या कानून है?

हमारे देश में सभी धर्मों के लोगों की शादी के लिए अपने-अपने पर्सनल लाॅ हैं। इनमें लड़का और लड़की एक ही धर्म का होना अनिवार्य है।

मतलब ये कि अगर दो अलग-अलग धर्म के लोग आपस में विवाह करना चाहें, तो उनमें से एक को धर्म परिवर्तन करना पड़ता है।

लेकिन अगर बिना धर्म बदले ही विवाह करना हो, तो ऐसे लोगों के लिए साल 1954 में स्पेशल मैरिज एक्ट बनाया गया।

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 में विशेष रूप से विवाह, रजिस्ट्रेशन और तलाक जैसे सभी प्रावधान बताए गए हैं।

इस एक्ट के तहत किसी भी धर्म के दो व्यक्ति बिना धर्म बदले कानूनन विवाह कर सकते हैं। ऐसे विवाह के लिए किसी समारोह की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

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