एजेसिंयों के जरिये डाटा जुटाने पर हाई कोर्ट से रोक की मांग, केंद्र सरकार को नोटिस जारी

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल मानिटरिंग सिस्टम (सीएमएस), नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड (नैटग्रिड) और नेटवर्क ट्रैफिक एनालिसिस (नेत्रा) के जरिये डाटा जुटाने पर रोक की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने संचार मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को 7 जनवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) और सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने दायर किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से कहा कि तीनों डाटा कलेक्शन सिस्टम लोगों की निजता का उल्लंघन कर रही है।

याचिका में मांग की गई है कि सीएमएस, नेत्रा और नैटग्रिड 24 घंटे लोगों के बारे में डाटा जुटाती रहती है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि कानून के मुताबिक मानिटरिंग करने के लिए न्यायिक या संसदीय निकाय गठित करने की जरूरत है।

ये निकाय टेलीग्राफ एक्ट औऱ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत मानिटरिंग या वारंट के आदेशों की समीक्षा करेगा।

याचिका में कहा गया है कि इन तीनों सिस्टम के जरिये संविधान की धारा 21 के अलावा खंड तीन में दी गई स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन है।

इन सिस्टम के जरिये केंद्र और राज्य सरकारों की एजेंसियों को बड़े पैमाने पर फोन या इंटरनेट कम्युनिकेशन पर नजर रखने की छूट मिल जाती है।

ऐसा करना लोगों के अधिकारों और निजता का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि इन सिस्टम के जरिये लोगों पर नजर रखना सुप्रीम कोर्ट के निजता के अधिकार के फैसले का उल्लंघन है।

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