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झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

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Jharkhand Congress Faces Internal Tussle: झारखंड प्रदेश कांग्रेस में मंत्रियों और पार्टी के विधायकों के बीच चल रहा विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।

संगठन के भीतर आपसी मतभेद इतने बढ़ गए हैं कि पांच विधायक अपनी शिकायतें लेकर नई दिल्ली तक पहुंच गए। पार्टी की कोशिशों के बावजूद यह विवाद पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

दिल्ली जाकर रखी गई शिकायतें

New Delhi गए विधायकों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी बात रखी। लौटने के बाद उन्होंने यह भी बताया कि दो-तीन विधायक निजी कारणों से दिल्ली नहीं जा सके थे।

इन विधायकों के नाम भी बातचीत में सामने आए। इस पूरे घटनाक्रम ने संगठन की अंदरूनी स्थिति को उजागर कर दिया है।

विधायकों के नाम आने से बढ़ी नाराजगी

शिकायतों के दौरान रामगढ़ विधायक Mamta Devi और दो अन्य विधायकों का नाम लिया गया।

वहीं कांके विधायक सुरेश बैठा ने यह भी कहा कि कई जिला अध्यक्षों को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं। सुरेश बैठा के इन बयानों के बाद पार्टी के कई नेता खुलकर नाराजगी जता रहे हैं।

मीडिया में बयान बना विवाद की वजह

सुरेश बैठा (Suresh Baitha) ने मीडिया से बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि ममता देवी को दिल्ली जाना था, लेकिन वे संगठनात्मक कार्यों में व्यस्त होने के कारण नहीं जा सकीं।

हालांकि, मीडिया में विधायकों के नाम लेने को लेकर पार्टी में असंतोष बढ़ गया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

आलाकमान की चेतावनी और संभावित कार्रवाई

प्रदेश कांग्रेस की ओर से प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि मीडिया में दिए गए बयानों पर आलाकमान ने संज्ञान लिया है। ऐसे मामलों में आगे चेतावनी या अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है। पार्टी चाहती है कि अंदरूनी बातें सार्वजनिक मंच पर न जाएं।

शांत कराने की कोशिश में नई जिम्मेदारी

विवाद को शांत करने के लिए पार्टी ने एक कदम और उठाया है। नई दिल्ली गए विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप को संगठन सृजन अभियान के तहत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

माना जा रहा है कि इससे नाराज विधायकों को मनाने और हालात को संभालने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, झारखंड कांग्रेस के भीतर चल रहा यह विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व के फैसलों से ही यह तय होगा कि संगठन में एकजुटता लौटती है या खींचतान और बढ़ती है।

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