
रांची: झारखंड हाईकोर्ट में आठ खनन लीज धारकों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कैबिनेट सचिवालय और विजिलेंस विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के पत्र पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लें। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई प्रारंभिक जांच की अनुमति पर निर्भर करेगी।
ACB ने मांगी थी जांच की अनुमति
जानकारी के अनुसार, ACB के एसपी ने 2 सितंबर 2025 को एक पत्र के माध्यम से इन खनन लीज धारकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति अभी तक कैबिनेट सचिवालय और विजिलेंस विभाग की ओर से नहीं दी गई है। इसी को लेकर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया है।
क्या हैं आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन आठ खनन लीज धारकों ने जिला खनन पदाधिकारी, पाकुड़ के प्रमाणपत्र में जालसाजी की और झारखंड स्टेट लेवल एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से पर्यावरण स्वीकृति हासिल कर ली। इस आधार पर उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
राज्य सरकार का पक्ष और कोर्ट का निर्देश
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित आठों खनन लीज पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि मामले में आगे की कार्रवाई ACB की प्रारंभिक जांच की अनुमति मिलने के बाद ही तय होगी। इसलिए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पत्र संख्या 582 (दिनांक 02.09.2025) पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
इस फैसले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग कब तक जांच की अनुमति देता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।
