Ranchi : रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों की खराब हालत और जिला स्कूल, रांची (अब सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ाई का अधिकार है, इसलिए स्कूलों की स्थिति सुधारना सरकार की जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान जर्जर भवनों, बिना छत वाले कमरों और शिक्षकों के खाली पदों का मुद्दा प्रमुख रूप से उठा।
स्कूलों की बदहाल स्थिति पर कोर्ट की चिंता
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी। कोर्ट ने कहा कि कई स्कूल न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं, जो चिंताजनक है। विशेष रूप से यह पूछा गया कि कितने स्कूल जर्जर इमारतों में चल रहे हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

जिला स्कूल की प्रतिष्ठा बहाल करने का आश्वासन
जिला स्कूल, रांची को लेकर दायर जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई। राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को भरोसा दिलाया कि स्कूल की पुरानी प्रतिष्ठा और गौरव लौटाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर आधारभूत ढांचे में सुधार की दिशा में काम शुरू किया जाएगा।
दोनों पीआईएल पर अलग-अलग सुनवाई
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य के कई स्कूलों से जुड़ी जनहित याचिका और जिला स्कूल से संबंधित याचिका अलग-अलग विषय हैं, इसलिए इनकी अलग-अलग सुनवाई होगी। अदालत ने जर्जर और बिना छत वाले स्कूलों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है, जहां सरकार से विस्तृत जवाब की उम्मीद की जा रही है।




