भारत

जज राजकुमार नहीं हैं कि कोर्ट में फैसला लिखने के दायित्व से बच सकें, CJI ने…

CJI ने कहा कि न्यायाधीश मुख्य रूप से लोगों की सेवा करने वाला और अधिकार दिलाने वाले होते हैं। कानून के शासन द्वारा शासित समाज को सुनिश्चित करना उनका मुख्य कर्तव्य है।

CJI DY Chandrachud : बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) ते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह बातें कही हैं।

उन्होंने कहा, “न्यायाधीशों के रूप में हम न तो राजकुमार हैं और न ही राजा हैं। जजों (Judge) की यह जिम्मेदारी है कि कोर्ट के फैसलों को समझने योग्य बनाया जाए।”

CJI ने कहा कि न्यायाधीश मुख्य रूप से लोगों की सेवा करने वाला और अधिकार दिलाने वाले होते हैं। कानून के शासन द्वारा शासित समाज को सुनिश्चित करना उनका मुख्य कर्तव्य है।

चंद्रचूड़ ने रियो डी जनेरियो शिखर सम्मेलन में निर्णयों में पारदर्शिता और समझने की योग्यता के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने इस दौरान भारतीय न्यायपालिका में प्रौद्योगिकी की प्रगति पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अदालतों की पुनर्कल्पना अब थोपे गये साम्राज्य के बजाय विमर्श की लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में की गई हैं।

ऐसा पता चल रहा है कि CJI का यह बयान Supreme Court और Highcourt के पिछले निर्णयों को पढ़ने के उनके अनुभव की उपज है।

आपको बता दें कि अदालतों द्वारा स्पष्ट रूप से लिखे जाने के बावजूद अधिकांश औसत शिक्षित लोगों के लिए कोर्ट के फैसलों को पढ़ना मुश्किल होता है।

इसका प्रमुख उदाहरण 1973 का ऐतिहासिक केशवानंद भारती फैसला है।

Back to top button
Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker