मामलों के लंबित रहने के लिए केवल न्यायाधीशों को दोष न दें: न्यायमूर्ति अमानुल्लाह

Archana Ekka
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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने शनिवार को कहा कि भारत में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के लिए केवल न्यायाधीशों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी अक्सर वकीलों की बहस और कानूनी प्रक्रिया के तरीके से प्रभावित होती है। न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, ‘‘न्यायाधीश और मामले के निपटारे की दर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। यह वकीलों पर निर्भर करता है कि वे कितनी देर तक बहस करना चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में देरी के लिए वकीलों और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को भी आत्ममंथन करना चाहिए।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।