
रांची : भारतीय संस्कृति में अनेक पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें महा रामनवमी का विशेष स्थान है। यह पावन पर्व भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष रामनवमी का पर्व 27 मार्च को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, जो हिंदू नववर्ष के आरंभिक दिनों में पड़ता है और नए संकल्पों, धर्म एवं सत्य के पालन का संदेश देता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के यहां लंबे समय तक संतान नहीं थी। उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके फलस्वरूप उनके यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ, जिनमें भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ। भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए जन्म लिया। उनका जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्शों का अनुपम उदाहरण है।
रामनवमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा भी है। भगवान राम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में हर रिश्ते और कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उन्होंने एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई और आदर्श राजा के रूप में समाज को दिशा दी। आज के युग में जब नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, तब रामनवमी हमें सत्य, न्याय और अनुशासन का पालन करने की प्रेरणा देती है।
रामनवमी के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और रामचरितमानस का पाठ होता है। विशेष रूप से अयोध्या में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं, जहां सरयू नदी में स्नान कर भक्त भगवान राम के जन्मोत्सव में भाग लेते हैं। जब राम जन्म का मुहूर्त होता है, मंदिरों में घंटा-घड़ियाल बजाकर और जयकारों के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।इस दिन शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, झांकियां सजाई जाती हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। कई स्थानों पर रामलीला का मंचन भी किया जाता है, जिससे लोगों को भगवान राम के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं से परिचित कराया जाता है।आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में रामनवमी का महत्व और भी बढ़ जाता है।
यह पर्व हमें अपने जीवन में संयम, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा अपनाने की सीख देता है। भगवान राम का जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। महा रामनवमी भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो आस्था, मर्यादा और आदर्शों का संगम है। यह न केवल भगवान राम के जन्म का उत्सव है, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर भी है। यदि हम उनके जीवन के सिद्धांतों को अपनाएं, तो समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता का विस्तार संभव है। यही इस महान पर्व का वास्तविक उद्देश्य है।
