हम अब विश्वगुरु नहीं हैं; संस्कृत को बढ़ावा देने की आवश्यकता: मुरली मनोहर जोशी

मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत को राजभाषा बनाने और क्वांटम कंप्यूटिंग में इसके उपयोग की बात कही, साथ ही भारत को विश्वगुरु कहने पर भी सवाल उठाया।

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नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार और ‘क्वांटम कंप्यूटिंग’ में भी इसके उपयोग की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि भारत अब विश्वगुरु नहीं है और इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जोशी ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाने की भी जोरदार वकालत की और कहा कि भीम राव आंबेडकर सहित कई लोगों ने अतीत में इसके लिए प्रयास किए थे, लेकिन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।