साइकिल यात्रा के बहाने सत्ता में वापसी की तैयारी में अखिलेश यादव

Digital News
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लखनऊ: पहले रथ यात्रा और अब साइकिल की सवारी। अखिलेश यादव 5 अगस्त को लखनऊ में साइकिल यात्रा निकालेंगे। समाजवादी पार्टी ने पूरे प्रदेश में साइकिल यात्रा करने का फ़ैसला किया है।

पार्टी के दिग्गज नेता रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती पर ये कार्यक्रम रखा गया है। बाईस में बाइसाइकिल के नारे के साथ समाजवादी पार्टी का इरादा सत्ता में वापसी का है।

पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए यूपी का चुनाव उनके लिए आर या पार की लड़ाई बन गई है।

लगातार तीन चुनाव हारने के बाद से पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश हाई करने के लिए अखिलेश साइकिल की सवारी कर रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राहुल गांधी के साथ गठबंधन किया था।

जबकि 2019 का लोकसभा चुनाव वे अपने कट्टर विरोधी मायावती के साथ मिल कर लड़े थे। लेकिन अखिलेश को इन चुनावों में कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

इसीलिए इस बार उन्होंने किसी भी बड़ी पार्टी से चुनावी तालमेल न करने की क़सम खाई है। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को लगता है कि योगी सरकार के ख़िलाफ़ लोगों में नाराज़गी है।

इसको मुद्दा बना कर वे एंटी इंकम्बेन्सी माहौल बना कर सत्ता में वापसी कर सकते हैं। उनकी इस राह में कांग्रेस, बीएसपी और ओवैसी की पार्टी जैसे रोड़े भी हैं।

इसीलिए तो हाल में ही उन्होंने कहा कि बीजेपी से लड़ने के बदले ये पार्टियॉं हमसे लड़ रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर से पहले अखिलेश ने राज्य के कई ज़िलों में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग कैंप भी लगवाए।

अब तैयारी सड़कों पर उतरने की है। 5 अगस्त को जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अयोध्या में रहेंगे।

राम मंदिर के भूमि पूजन के एक साल होने पर वे रामलला के दरबार में होंगे। पूर्व सीएम अखिलेश लखनऊ की सड़कों पर साइकिल की सवारी करेंगे।

राज्य की हर तहसील पर ये साइकिल यात्रा निकाली जाएगी। लखनऊ कंट्रोल रूम से पल पल की नज़र रखी जाएगी।

पार्टी के बड़े बड़े नेताओं की ज़िलों में ड्यूटी लगाई गई है। कोशिश साइकिल यात्रा के बहाने हवा बनाने की है।

सांसदों, पूर्व मंत्रियों, विधायकों, विधान परिषद के सदस्यों से लेकर पार्टी के पदाधिकारियों को साइकिल चलाने को कहा गया है।

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