मिड-डे मील में बच्चों के साथ भेदभाव : फल की जगह दी गई गाजर-मटर, प्रिंसिपल निलंबित

यह Video फरवरी महीने का बताया जा रहा है, जिस पर अब जाकर शिक्षा विभाग ने एक्शन लिया है। इसी के साथ अन्य सरकारी स्कूलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों के पोषण और खाने की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें

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Mid-Day Meal Scheme Aligarh: अलीगढ़ के बिजौली विकासखंड स्थित कंपोजिट विद्यालय सिरसा में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को फल के स्थान पर गाजर और मटर बांटे जाने का मामला सामने आया है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है।

वीडियो वायरल होने पर हुई कार्रवाई

वायरल वीडियो में सरकारी स्कूल के बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर गाजर और मटर खाते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राजेश कुमार सिंह ने मामले की जांच कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि स्कूल प्रशासन ने मिड-डे मील योजना के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।

जांच में मिलीं और भी खामियां

BSA ने बताया कि जांच के दौरान स्कूल में पढ़ाई का माहौल भी संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके अलावा मिड-डे मील के संचालन में भी लापरवाही बरती जा रही थी। इसी के चलते स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया और अन्य स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि वे मिड-डे मील योजना के नियमों का सख्ती से पालन करें।

देर से हुई कार्रवाई, लेकिन सख्त चेतावनी जारी

यह Video फरवरी महीने का बताया जा रहा है, जिस पर अब जाकर शिक्षा विभाग ने एक्शन लिया है। इसी के साथ अन्य सरकारी स्कूलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों के पोषण और खाने की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें।

मिड-डे मील में लगातार सामने आ रहीं गड़बड़ियां

गौरतलब है कि मिड-डे मील योजना में अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कासगंज में राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ के निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील में बासी रोटियां परोसी गईं।

इससे पहले मैनपुरी के एक प्राथमिक विद्यालय में भी मिड-डे मील में बच्चों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त भोजन न मिलने की शिकायत मिली थी। बच्चों ने खुलासा किया कि स्कूल में अक्सर कम खाना बनता है, जिससे उन्हें भूखा रहना पड़ता है।

इस तरह की घटनाएं बच्चों के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के साथ अन्याय है। शिक्षा विभाग ने दोबारा ऐसी लापरवाही होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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