Latest NewsUncategorizedजजों की ट्रेनिंग के लिए विशेष कॉलेज नहीं खोलेगी केंद्र सरकार

जजों की ट्रेनिंग के लिए विशेष कॉलेज नहीं खोलेगी केंद्र सरकार

Published on

spot_img
spot_img
spot_img

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने निचली अदालतों के न्यायाधीशों के लिए कैडर व्यवस्था बनाने और उनके लिए विशेष केंद्रीय प्रशिक्षण कॉलेज खोलने के सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

इस कॉलेज में लॉ कॉलेज में एलएलबी की तरह जजों के कोर्स शुरू किए जाते और उन्हें सीधे निचली अदालतों में जज नियुक्त किया जाता।

केंद्रीय जज प्रशिक्षण संस्थान बनाने का यह प्रस्ताव पिछले माह रिटायर हुए मुख्य न्यायाधीश एसए बोब्डे ने किया था। वह चाहते थे कि लॉ कालेजों में जो पढ़ाया जाता है वह छात्रों को वकील तो बनाता है लेकिन जज नहीं बनाता।

उनका मानना है कि जजशिप एक अलग किस्म की विधा है जिसे अलग से पढ़ाया जाना चाहिए। लॉ ग्रेजुएट वकील जब न्यायिक परीक्षा के बाद जज बनते हैं तो उन्हें न्यायिक अकादमियों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है।

न्यायिक कादमी लगभग हर राज्य में है और संबंधित हाईकोर्ट के निर्देशन में काम करती हैं। जस्टिस बोब्डे मानते थे कि चयन के बाद जज को ट्रेनिंग के लिए भेजने के बाजाए एक ऐसा केंद्रीय संस्थान कॉलेज हो जिसमें सिर्फ जजों की ही पढ़ाई हो।

जज कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा हो और कोर्स करने के बाद उन्हें सीधे न्यायिक सेवा में लगाया जाए।

उन्होंने पुणे स्थित सेना के मेडिकल कॉलेजों का उदाहरण लिया था जिसमें 12वीं पास छात्रों को प्रवेश परीक्षा के आधार पर एमबीबीएस की पढ़ाई करवाई जाती है और उन्हें सीधे सैन्य सेवाओं में कमीशन दे दिया जाता है।

इसके लिए उनसे कुछ वर्षों की आवश्यक सेवा के लिए बांड भरवाया जाता है।

सूत्रों के अनुसार जस्टिस बोब्डे ने इन कॉलेजों के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी भी बनाई थी जिसने सेना के मेडिकल कॉलेजों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की थी।

कमेटी ने पाया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में ऐसे कॉलेजों का गठन किए जाने में कोई समस्या नहीं है जिसमें भावी न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा सके।

न्यायिक अकादमी लगभग हर राज्य में है और संबंधित हाईकोर्ट के निर्देशन में काम करती हैं।

गौरतलब है कि देश की निचली अदालतों में लगभग 5000 न्यायिक अधिकारियों की रिक्तियां हैं और 2.5 लाख के आसपास मुकदमों का बोझ है।

सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार को ये प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इसे न्यायिक व्यवस्था के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया और कहा कि इस पर संसद ही कोई फैसला ले सकती है। गत माह जस्टिस बोब्डे रिटायर हो गए और यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।

spot_img

Latest articles

NIA मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सहित 17 राज्यों को नोटिस

Supreme Court strict on delay in NIA cases: देश में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)...

झारखंड के कोयला क्षेत्रों में आम हड़ताल का व्यापक असर, उत्पादन और कामकाज ठप

Impact of the Nationwide General Strike : केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित...

पर्यावरण पर सजी खास फिल्म महोत्सव की शाम, राज्यपाल ने किया उद्घाटन

CMS Vatavaran Ranchi Travelling Film Festival Inaugurated : रांची के ऑड्रे हाउस में मंगलवार...

कोकर इलाके में कार-ऑटो की टक्कर, पांच लोग घायल, पुलिस ने संभाला मोर्चा

Car-Auto Collision : राजधानी रांची के कोकर इलाके में गुरुवार दोपहर एक तेज रफ्तार...

खबरें और भी हैं...

NIA मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सहित 17 राज्यों को नोटिस

Supreme Court strict on delay in NIA cases: देश में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)...

झारखंड के कोयला क्षेत्रों में आम हड़ताल का व्यापक असर, उत्पादन और कामकाज ठप

Impact of the Nationwide General Strike : केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित...

पर्यावरण पर सजी खास फिल्म महोत्सव की शाम, राज्यपाल ने किया उद्घाटन

CMS Vatavaran Ranchi Travelling Film Festival Inaugurated : रांची के ऑड्रे हाउस में मंगलवार...